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पश्चिम बंगाल: अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और दान को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्र सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का दावा किया है। उन्होंने कहा कि मंदिर में चढ़ाए गए 1250 किलो सोना, 70 किलो चांदी और करीब 3500 करोड़ रुपये के दान का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा सामने नहीं आया है।
महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 में ही ऑडिटर्स ने यह चेतावनी दी थी कि मंदिर ट्रस्ट को जो “रॉ डोनेशन” मिल रहा है, उसका सही रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये के चंदे और कीमती धातुओं का हिसाब आखिर कहां गया। उन्होंने यह भी कहा कि सिंधी समुदाय द्वारा दान की गई 200 चांदी की ईंटों का भी कोई पता नहीं है।
टीएमसी सांसद ने यह दावा भी किया कि राम मंदिर ट्रस्ट सीधे प्रधानमंत्री की निगरानी में काम करता है, इसलिए इस कथित गड़बड़ी की नैतिक जिम्मेदारी भी शीर्ष स्तर पर तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में केवल कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी कर कार्रवाई को सीमित कर दिया गया है, जबकि बड़े स्तर पर जांच होनी चाहिए।
इस मामले पर उत्तर प्रदेश पुलिस और एसआईटी की जांच जारी है। अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और कुछ नकदी भी बरामद की गई है। वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और आभूषण सुरक्षित हैं और उनका पूरा रिकॉर्ड रखा गया है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद यह मामला और भी चर्चा में आ गया है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है, जबकि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।





