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दुर्गापुर। पश्चिम बंगाल के पश्चिमी बर्धमान जिले के दुर्गापुर में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की 20 फीट ऊंची प्रतिमा को लेकर खड़ा हुआ विवाद फिलहाल शांत होता दिखाई दे रहा है। प्रतिमा हटाए जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे दोबारा उसी स्थान पर स्थापित करने की मांग करते हुए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। मामले के तूल पकड़ने के बाद स्थानीय पुलिस ने देर रात नेहरू की प्रतिमा को दोबारा उसी स्थान पर स्थापित करा दिया। इसके बाद कई दिनों से जारी राजनीतिक विवाद में नया मोड़ आ गया है।
दुर्गापुर में नेहरू की प्रतिमा हटाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई थी। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए प्रशासन से तत्काल प्रतिमा को पुराने स्थान पर लगाने की मांग की थी। कांग्रेस ने साफ कर दिया था कि यदि 24 घंटे के भीतर प्रतिमा को वापस नहीं लगाया गया तो पार्टी बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध बढ़ने के बाद प्रशासन और पुलिस सक्रिय हुए। बताया जा रहा है कि देर रात पुलिस की मौजूदगी में पंडित जवाहरलाल नेहरू की करीब 20 फीट ऊंची प्रतिमा को फिर से उसी जगह स्थापित कर दिया गया। प्रतिमा दोबारा लगाए जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांग पूरी हो गई है।
देश के पहले प्रधानमंत्री की प्रतिमा से जुड़ा मामला होने के कारण विवाद जल्द ही स्थानीय मुद्दे से निकलकर राजनीतिक मुद्दे में बदल गया था। कांग्रेस ने इसे पंडित जवाहरलाल नेहरू और देश के स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़ते हुए प्रतिमा हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। पार्टी नेताओं का कहना था कि नेहरू आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं में शामिल रहे हैं और उनकी प्रतिमा को इस तरह हटाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन को 24 घंटे की समयसीमा दी थी। इसके साथ ही चेतावनी दी गई थी कि अगर प्रतिमा पुराने स्थान पर वापस नहीं लगाई गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी की इस चेतावनी के बाद स्थानीय प्रशासन पर विवाद का समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया था।
देर रात प्रतिमा को वापस स्थापित किए जाने के बाद स्थिति में बदलाव आया। पुलिस की मौजूदगी में प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से उसी स्थान पर लगाया गया। इसके बाद प्रशासन की ओर से क्षेत्र में स्थिति सामान्य बनाए रखने पर ध्यान दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर महापुरुषों की प्रतिमाओं और उनसे जुड़ी राजनीतिक संवेदनशीलता को चर्चा में ला दिया है। सार्वजनिक स्थानों पर लगी राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिमाएं केवल स्मारक नहीं होतीं बल्कि उनसे अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों की भावनाएं भी जुड़ी होती हैं। यही वजह है कि किसी प्रतिमा को हटाने, स्थानांतरित करने या नुकसान पहुंचने की घटना कई बार बड़े विवाद का रूप ले लेती है।
दुर्गापुर में भी नेहरू की प्रतिमा का मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेने लगा था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ विवाद को जल्द समाप्त करने की चुनौती थी। प्रतिमा को दोबारा लगाए जाने के फैसले को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे और उन्होंने लंबे समय तक देश का नेतृत्व किया। कांग्रेस के लिए नेहरू पार्टी के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक नेताओं में शामिल हैं। यही कारण है कि उनकी प्रतिमा से जुड़े विवाद पर कांग्रेस ने तत्काल प्रतिक्रिया दी और इसे सम्मान तथा राजनीतिक विरासत का मुद्दा बनाया।
कांग्रेस नेताओं का कहना था कि नेहरू की प्रतिमा को उसी जगह स्थापित किया जाना चाहिए जहां वह पहले लगी हुई थी। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस मांग को लेकर प्रशासन के सामने अपना विरोध दर्ज कराया। 24 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने से यह मामला और गंभीर हो गया था।
अब प्रतिमा दोबारा स्थापित होने के बाद कांग्रेस की ओर से प्रस्तावित बड़े आंदोलन की संभावना फिलहाल कम हो सकती है। हालांकि पार्टी इस मामले में यह सवाल उठा सकती है कि प्रतिमा को हटाया ही क्यों गया था और इसके पीछे किस स्तर पर निर्णय लिया गया था। ऐसे में विवाद पूरी तरह खत्म हुआ है या राजनीतिक बयानबाजी जारी रहेगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
स्थानीय प्रशासन के लिए भी इस घटना के बाद यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि प्रतिमा और उसके आसपास की व्यवस्था को लेकर दोबारा किसी तरह का विवाद न हो। पुलिस की मौजूदगी में प्रतिमा लगाए जाने से प्रशासन ने तत्काल स्थिति को संभालने का प्रयास किया है।
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों के बीच पहले से ही कई मुद्दों को लेकर तीखी बयानबाजी होती रही है। ऐसे में नेहरू की प्रतिमा का विवाद भी तेजी से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया। कांग्रेस ने इसे अपने ऐतिहासिक नेता के सम्मान से जोड़ते हुए किसी भी तरह का समझौता नहीं करने की बात कही थी।
फिलहाल दुर्गापुर में पंडित जवाहरलाल नेहरू की 20 फीट ऊंची प्रतिमा फिर से अपने पुराने स्थान पर स्थापित कर दी गई है। कांग्रेस के 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद देर रात हुई इस कार्रवाई से तत्काल विवाद शांत होने की उम्मीद है। अब सभी की निगाह इस बात पर रहेगी कि प्रतिमा हटाए जाने के कारणों को लेकर प्रशासन की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है और कांग्रेस इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाती है।





