पश्चिम बंगाल

NEET रिजल्ट विवाद: फर्जी दस्तावेजों पर हाई कोर्ट सख्त

Saba Naaz
31 July 2026 10:00 PM IST
NEET रिजल्ट विवाद: फर्जी दस्तावेजों पर हाई कोर्ट सख्त
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वेस्ट बंगाल: नीट परीक्षा परिणामों में कथित धांधली का आरोप लगाकर अदालत पहुंचे कुछ परीक्षार्थियों के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने फर्जी दस्तावेजों और जाली ओएमआर शीट के आधार पर याचिका दायर करने वाले छात्रों पर नाराजगी जताते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि कुछ परीक्षार्थियों ने नीट परीक्षा में कम अंक मिलने का आरोप लगाकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन जांच के दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आई। कई मामलों में छात्रों की ओर से पेश की गई ओएमआर शीट और अन्य रिकॉर्ड फर्जी पाए गए।

सुनवाई के दौरान एनटीए की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि कुछ छात्रों ने गलत और छेड़छाड़ किए गए दस्तावेजों के आधार पर याचिकाएं दाखिल की थीं। एक मामले में तो एक छात्र ने अदालत के सामने तीन अलग-अलग परिणाम पेश कर दिए, जिससे कोर्ट को भ्रमित करने की कोशिश की गई। एनटीए ने कहा कि ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें भविष्य की परीक्षाओं से प्रतिबंधित भी किया जा सकता है।

एनटीए ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि फर्जी दस्तावेज पेश करने वाले परीक्षार्थियों पर तीन साल तक नीट परीक्षा में शामिल होने पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। एजेंसी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस तरह की धोखाधड़ी पर सख्ती जरूरी है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि कुछ लोगों ने जाली दस्तावेजों के माध्यम से केवल परीक्षा व्यवस्था को ही नहीं, बल्कि न्यायपालिका को भी गुमराह करने का प्रयास किया है। अदालत ने ऐसे मामलों को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

एक अन्य मामले में एक छात्र ने नीट परिणाम में 370 अंकों की गड़बड़ी का आरोप लगाया था। जांच में यह दावा भी गलत पाया गया। इसके बाद छात्र ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने इस मामले में भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि गलत तथ्यों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर न्याय पाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।

इस पूरे घटनाक्रम का असर उन वकीलों पर भी पड़ा है, जो इन छात्रों की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे थे। कई वकीलों ने कहा कि उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि छात्र इस तरह के फर्जी दस्तावेजों के साथ अदालत आएंगे। उनका कहना है कि वकीलों के लिए हर दस्तावेज की सत्यता की जांच करना संभव नहीं होता, जिसके कारण उन्हें अदालत के सामने असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।

कुछ वरिष्ठ वकीलों ने ऐसे मामलों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि कई मामलों में अब जूनियर वकीलों के माध्यम से याचिकाएं वापस ली जा रही हैं। वकीलों का कहना है कि किसी भी परीक्षा विवाद में अदालत जाने से पहले तथ्यों और दस्तावेजों की पूरी जांच जरूरी है।

नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। हाई कोर्ट के इस फैसले को परीक्षा व्यवस्था में अनुशासन और निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अदालत के सख्त रुख से यह संदेश गया है कि गलत दस्तावेजों के सहारे न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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