पश्चिम बंगाल

जेल से बाहर आए नंदीग्राम के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान, गिरफ्तारी को लेकर लगाए गंभीर आरोप

Kavita2
1 Oct 2026 10:50 AM IST
जेल से बाहर आए नंदीग्राम के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान, गिरफ्तारी को लेकर लगाए गंभीर आरोप
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान बुधवार को पूर्वी मेदिनीपुर की हल्दिया जेल से रिहा हुए। बाहर निकलते ही उन्होंने अपनी गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत के दौरान हुए व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। प्रधान ने दावा किया कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई और उन्हें पुलिस वाहन में बैठाकर ले जाया गया, जिससे उन्हें अपनी जान को लेकर डर लगने लगा था।

मिलन प्रधान ने कहा कि जिस तरह उन्हें होटल से बाहर निकालकर वाहन में बैठाया गया और आंखों पर पट्टी बांधी गई, उससे उन्हें आशंका हुई कि कहीं उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर तो नहीं ले जाया जा रहा। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद उन पर नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। ये सभी आरोप मिलन प्रधान की ओर से लगाए गए हैं; पुलिस ने उनकी इन विशिष्ट बातों की पुष्टि नहीं की है।

57 वर्षीय मिलन प्रधान नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। उन्हें 18 सितंबर को नंदीग्राम के पास चांदीपुर स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी ऐसे समय हुई थी जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा की थी। इस घटनाक्रम के कुछ ही घंटों बाद पुलिस कार्रवाई हुई, जिससे मामला तुरंत राजनीतिक विवाद का विषय बन गया।

पुलिस के अनुसार प्रधान की गिरफ्तारी पुराने मामलों से जुड़े लंबित गैर-जमानती वारंट के आधार पर की गई थी। उन पर 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े मामलों में दंगा, हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, आपराधिक धमकी और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप दर्ज थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने बाद में प्रधान को अंतरिम जमानत दी। अदालत ने उन्हें चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देते हुए सीमित अवधि के लिए राहत प्रदान की। हाई कोर्ट के आदेश के बाद वह बुधवार को हल्दिया उप-सुधार गृह से बाहर आए और जेल से निकलते ही चुनाव प्रचार शुरू कर दिया। उन्हें 21 अक्टूबर को संबंधित अदालत के सामने आत्मसमर्पण करना है।

रिहाई के बाद प्रधान ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी का नाम लेते हुए सवाल उठाया कि नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को लेकर इतनी राजनीतिक चिंता क्यों दिखाई जा रही है। प्रधान ने अपनी गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक कारण होने का आरोप लगाया है। हालांकि भाजपा या पुलिस की ओर से उनके इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है।

नंदीग्राम सीट पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच हाई-प्रोफाइल मुकाबला हुआ था। अब उपचुनाव के दौरान भी यह सीट एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गई है।

उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है। ऐसे में मिलन प्रधान की गिरफ्तारी और फिर अंतरिम जमानत ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अदालत से राहत मिलने के बाद अब उन्हें कुछ दिनों के लिए चुनाव प्रचार करने का मौका मिला है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जेल से बाहर आने पर उनका स्वागत किया और उनके समर्थन में नारेबाजी की।

दूसरी ओर राज्य सरकार ने हाई कोर्ट की ओर से दी गई अंतरिम जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। हालांकि शीर्ष अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया और मामले को आगे की तारीख के लिए सूचीबद्ध किया। इससे फिलहाल प्रधान को चुनाव प्रचार करने का रास्ता खुला हुआ है।

इस पूरे मामले में कांग्रेस लगातार यह आरोप लगा रही है कि चुनावी मैदान में उसके उम्मीदवार को दबाव में लाने के लिए राज्य मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पुराने आपराधिक मामलों और लंबित वारंट के आधार पर की गई। इस तरह गिरफ्तारी की वजह को लेकर राजनीतिक और पुलिस पक्ष एक-दूसरे से अलग हैं।

ममता बनर्जी के गुट द्वारा प्रधान को समर्थन दिए जाने के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक हो गया। तृणमूल उम्मीदवार के पीछे हटने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा की थी। इसके कुछ ही घंटों बाद प्रधान की गिरफ्तारी हुई। विपक्षी दलों ने इस समय-क्रम को लेकर सवाल उठाए, जबकि पुलिस ने कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया।

जेल से बाहर आने के बाद प्रधान ने प्रचार तेज करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि वह मतदाताओं के बीच जाकर अपनी बात रखेंगे और गिरफ्तारी से उनकी चुनावी लड़ाई कमजोर नहीं होगी। कांग्रेस भी इस पूरे घटनाक्रम को चुनावी मुद्दे के रूप में उठा रही है।

अब नंदीग्राम उपचुनाव में मुकाबला केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं रह गया है, बल्कि गिरफ्तारी, जमानत, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी चुनावी बहस का हिस्सा बन गए हैं। मतदान में अब कुछ ही दिन बाकी हैं और ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

फिलहाल मिलन प्रधान अंतरिम जमानत पर बाहर हैं और चुनाव प्रचार कर रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, जबकि पुलिस पुराने मामलों और न्यायिक प्रक्रिया का हवाला दे रही है। अब सभी की निगाह 6 अक्टूबर के मतदान और उसके बाद नंदीग्राम के चुनावी नतीजों पर टिकी है।

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