पश्चिम बंगाल

मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा- 'कोलकाता निकाय चुनाव में क्लीन स्वीप करेगी TMC'

Gulabi
1 Dec 2021 12:58 PM GMT
मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा- कोलकाता निकाय चुनाव में क्लीन स्वीप करेगी TMC
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मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा
कोलकाता के पूर्व मेयर और परिवहन मंत्री फिरहाद हकीम (Firhad Hakim) ने कहा कि विधानसभा चुनावों में अपनी जीत का ट्रेंड बरकरार रखते हुए पार्टी निकाय चुनाव (Municipal Election) में भी क्लीन स्वीप करेगी. वार्ड संख्या 82 से चुनाव जीतने को लेकर आश्वस्त हाकिम ने यह भी कहा कि शहर को चक्रवात के प्रभाव से बेहतर तरीके से निपटने में मदद करने के लिए जल्द ही एक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा. बता दें कि राज्य चुनाव आयोग ने 19 दिसंबर को कोलकाता नगर निगम चुनाव में मतदान कराने का ऐलान किया है.
राज्य के परिवहन मंत्री ने आगे कहा कि शहर के लिए उनका 10 सूत्रीय दृष्टिकोण अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करेगा और पर्यावरण से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने के अलावा हर घर में पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा. हकीम ने कहा कि पार्टी 144 सदस्यीय निकाय में कम से कम 135-140 वार्ड हासिल करने के लिए आश्वस्त है. उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजेपी की "सांप्रदायिक राजनीति का कोई परिणाम नहीं निकलेगा", जैसा कि राज्य के विधानसभा चुनावों के दौरान हुआ था.
बीजेपी की पराजय है तय- बोले फिरहाद
उन्होंने कहा, "बीजेपी को चुनाव के दौरान सांप्रदायिक बयानों को बढ़ावा देने की आदत है. विधानसभा चुनावों में भी हमने देखा था कि कैसे सांप्रदायिक तनाव को भड़काने की कोशिश की थी. लेकिन मैं यह स्पष्ट कर दूं कि इस बार भी बीजेपी हारेगी." ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माने जाने वाले हकीम ने दिसंबर 2018 में कोलकाता के मेयर के रूप में पदभार ग्रहण किया था. उन्होंने कहा, "मुझे ममता बनर्जी ने एक काम सौंपा है और मैं इसे पूरा करने की पूरी कोशिश करूंगा. " अपनी 10 सूत्री योजना के बारे में बात करते हुए, फिरहाद हकीम ने आगे बताया, "सौंदर्यीकरण, कराधान में आसानी, अपशिष्ट उत्पादों के बेहतर प्रबंधन से लेकर अधिक हरियाली सुनिश्चित करने और जल निकासी व्यवस्था में सुधार के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा."
माकपा-कांग्रेस के अलग-अलग लड़ने से टीएमसी से होगा फायदा
इसी साल अप्रैल-मई महीने में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के दौरान एक साथ लड़ने वाली माकपा-कांग्रेस केएमसी का चुनाव अलग-अलग लड़ रही हैं.दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैंय आजादी के बाद बंगाल में कांग्रेस और उसके बाद 33 सालों तक शासन करने वाले वामपंथी पार्टियां अब राज्य में राजनीतिक तौर पर अवशेष बन चुकी हैं. पार्टी के कोर समर्थक ही मतदाता के तौर पर रह गए हैं जो दोनों पार्टियों के एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर एकजुट वोट करते हैं जिससे चुनाव परिणाम पर थोड़ा बहुत असर पड़ता रहा है. हालांकि इस बार केएमसी में दोनों पार्टियों के अलग-अलग चुनाव लड़ने से यह वोट भी बंट सकता है जिसका लाभ आखिरकार सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस को मिलने का दावा किया जा रहा है.
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