पश्चिम बंगाल

फुटपाथ विवाद में घिरीं मंत्री अग्निमित्रा पॉल, महिला से सवाल पर बवाल

Kavita2
25 Aug 2026 10:41 AM IST
फुटपाथ विवाद में घिरीं मंत्री अग्निमित्रा पॉल, महिला से सवाल पर बवाल
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की शहरी विकास एवं नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल को कोलकाता में फुटपाथ पर रह रहे एक परिवार को हटाने की कोशिश को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। विवाद उस समय बढ़ गया जब कार्रवाई के दौरान परिवार की एक महिला अपने पोते-पोतियों के लिए दूध उबालती नजर आई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मंत्री के व्यवहार और फुटपाथ पर रहने वाले परिवार के साथ उनके तरीके को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

मामला सामने आने के बाद पॉल ने अपने आलोचकों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पूरी बहस को अतिक्रमण और फुटपाथों पर अवैध कब्जे जैसे बड़े मुद्दे से हटाकर केवल दूध उबालने की घटना तक सीमित कर दिया गया। मंत्री ने दावा किया कि सरकार का उद्देश्य शहर और फुटपाथों को साफ-सुथरा तथा सुरक्षित बनाना है।

वीडियो सामने आने के बाद विवाद

अग्निमित्रा पॉल ने शनिवार को फेसबुक पर घटना से जुड़ा एक वीडियो साझा किया था। वीडियो में वह पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों की मौजूदगी में फुटपाथ पर मौजूद एक महिला से सवाल करती नजर आ रही हैं। महिला के पास खाना बनाने के लिए चूल्हा जल रहा था।

वीडियो में पॉल महिला से पूछती हैं कि वह फुटपाथ पर खाना क्यों बना रही है। महिला घबराई हुई दिखाई देती है और जवाब देती है कि वह बच्चे के लिए दूध उबाल रही थी। इसके बाद पॉल परिवार का कुछ सामान हटाती नजर आती हैं और महिला से सवाल करती हैं कि बच्चे के लिए फुटपाथ पर दूध क्यों उबाला जा रहा है तथा क्या फुटपाथ घर बसाने की जगह है।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस बातचीत को लेकर प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। आलोचकों ने सवाल उठाया कि फुटपाथ पर रहने वाले परिवार के प्रति प्रशासनिक कार्रवाई का तरीका संवेदनशील होना चाहिए था। खास तौर पर महिला के बच्चों के लिए दूध गर्म करने की बात कहने के बाद भी कार्रवाई जारी रखने को लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई।

मंत्री ने आलोचकों पर साधा निशाना

विवाद बढ़ने के बाद पॉल ने अपने रुख का बचाव किया। उन्होंने कहा कि आलोचक जानबूझकर मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, शहर के फुटपाथों पर अतिक्रमण और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल का मुद्दा ज्यादा महत्वपूर्ण है, लेकिन चर्चा को केवल दूध उबालने की घटना पर केंद्रित कर दिया गया।

मंत्री ने कहा कि सरकार का अभियान शहर और फुटपाथों को साफ रखने तथा उन्हें आम लोगों के लिए सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। उन्होंने इस अभियान में बाधा डालने वालों पर भी निशाना साधा।

दुर्घटना की संभावना का दिया हवाला

पॉल ने फुटपाथ पर जल रहे चूल्हे और उसके पास से गुजरने वाले वाहनों का हवाला देते हुए कहा कि वहां दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। उनके मुताबिक, सड़क और फुटपाथ के बीच बेहद कम जगह होने की स्थिति में जलता हुआ चूल्हा खतरनाक हो सकता है।

मंत्री ने इसी आधार पर फुटपाथ पर खाना पकाने को सुरक्षा के नजरिए से भी गंभीर मुद्दा बताया। उनका कहना था कि खुले में चूल्हा जलाने से आग लगने या किसी व्यक्ति के वाहन की चपेट में आने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

फुटपाथ पर रहने वालों का मुद्दा

घटना ने कोलकाता में फुटपाथ पर रहने वाले लोगों की स्थिति को लेकर भी बहस छेड़ दी है। महानगर में कई परिवार लंबे समय से फुटपाथों, फ्लाईओवर के नीचे या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। इनके सामने आवास, रोजगार, भोजन और बच्चों की शिक्षा जैसी कई समस्याएं होती हैं।

शहरी विकास और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती यह होती है कि सार्वजनिक स्थानों को खाली कराने के साथ-साथ कमजोर वर्गों के पुनर्वास और मानवीय जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए।

आलोचकों का कहना है कि फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जरूरी हो सकती है, लेकिन ऐसी कार्रवाई के दौरान परिवारों और खासकर बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखना भी महत्वपूर्ण है। वहीं, सरकार और प्रशासन की ओर से अक्सर तर्क दिया जाता है कि सार्वजनिक स्थानों पर लंबे समय तक कब्जा रहने से पैदल चलने वालों और यातायात की सुरक्षा प्रभावित होती है।

राजनीतिक बहस भी तेज

अग्निमित्रा पॉल के इस कदम ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है। फैशन डिजाइनर से राजनीति में आईं पॉल भाजपा की नेता हैं और पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी शहरी विकास और नगर मामलों से जुड़ी हुई है।

विपक्ष और सरकार के आलोचक इस घटना को गरीब और फुटपाथ पर रहने वाले लोगों के प्रति प्रशासन के रवैये से जोड़कर देख सकते हैं। दूसरी ओर, भाजपा की ओर से इसे शहर में अतिक्रमण हटाने और सार्वजनिक स्थानों को व्यवस्थित करने की मुहिम के रूप में पेश किया जा रहा है।

दूध उबालने की घटना बनी केंद्र में

पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा उस महिला के बयान की हो रही है, जिसने मंत्री के सवाल के जवाब में कहा कि वह बच्चे के लिए दूध उबाल रही थी। वीडियो में महिला का घबराया हुआ व्यवहार भी दिखाई देता है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर कई लोगों ने मंत्री की कार्रवाई की आलोचना की।

हालांकि, पॉल का कहना है कि विवाद को केवल दूध तक सीमित करना सही नहीं है। उनके मुताबिक, असली मुद्दा फुटपाथ पर अतिक्रमण, खुले में खाना पकाना और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा है।

फिलहाल घटना ने कोलकाता में फुटपाथों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और उसके मानवीय पहलू को लेकर बहस तेज कर दी है। एक तरफ सरकार शहर को साफ-सुथरा और सुरक्षित बनाने के लिए सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त कराने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे परिवारों के पुनर्वास और उनके साथ संवेदनशील व्यवहार की मांग उठ रही है। अग्निमित्रा पॉल के वीडियो के बाद यह विवाद अब केवल एक परिवार को हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहरी विकास, गरीबों के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।

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