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मेदिनीपुर: पश्चिम मेदिनीपुर जिले के दासपुर में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) की सुनवाई को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। दस्तावेज जमा करने के बावजूद मतदाताओं को ‘प्राप्ति रसीद’ (रिसीव कॉपी) नहीं दिए जाने के आरोप को लेकर स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक ममता भूइयां ने चुनाव आयोग और प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
रविवार दोपहर दासपुर-एक ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडियो) कार्यालय में चल रही सुनवाई के दौरान विधायक ममता भूइयां अचानक वहां पहुंचीं। उन्होंने कतार में खड़े मतदाताओं से बातचीत की, जहां कई लोगों ने शिकायत की कि आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद भी उन्हें रसीद नहीं दी जा रही है। इस पर विधायक ने नाराजगी जताते हुए मतदाताओं से कहा कि वे दस्तावेज जमा करने के प्रमाण के तौर पर रसीद लेकर ही लौटें। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मतदाताओं को रसीद के लिए दोबारा लाइन में लगना पड़ रहा है, जो उत्पीड़न के समान है।
विधायक ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय मतदाता दिवस के मौके पर मतदाताओं को घंटों लाइन में खड़ा कर परेशान किया जा रहा है, जबकि पहले कभी ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली।
सुनवाई केंद्र पर अव्यवस्था का एक उदाहरण जयकृष्णपुर गांव की 85 वर्षीय वृद्धा मेहकजान बीबी के मामले में सामने आया। वह अपने पोते खोकन खान के साथ सुनवाई के लिए पहुंचीं। आरोप है कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद त्रुटि सुधार के लिए उन्हें बुलाया गया। खोकन खान ने बताया कि फोटो खिंचवाने और दस्तावेज जमा करने के बाद उन्हें बिना रसीद दिए लौटने को कहा गया, जिस पर संयुक्त बीडीओ सुजन डोलई के साथ उनकी तीखी बहस हुई। विधायक के हस्तक्षेप के बाद अंततः उन्हें रसीद दी गई।
इस बीच, बीडीओ दीपांकर विश्वास ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव आयोग के सभी निर्देशों का पालन किया जा रहा है और रसीद न देने की शिकायत सही नहीं है।
वहीं, सोमवार सुबह इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के घाटाल संगठनात्मक जिला उपाध्यक्ष प्रशांत बेरा ने कहा कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन राज्य सरकार के अधिकारी और कर्मचारी ही कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक मतदाताओं को गुमराह कर रही हैं और आयोग के काम में बाधा डाल रही हैं।





