पश्चिम बंगाल

नंदीग्राम में ममता का कांग्रेस को समर्थन

Kavita2
21 Sept 2026 10:05 AM IST
नंदीग्राम में ममता का कांग्रेस को समर्थन
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर नए सियासी समीकरण सामने आए हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिए जाने के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब कांग्रेस और टीएमसी के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत और संभावनाओं की खबरें सामने आ रही थीं। हालांकि दोनों दलों के बीच व्यापक गठबंधन पर सहमति नहीं बन सकी।

नंदीग्राम विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित सीटों में से एक रही है। इस सीट का राजनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनाव में इसी क्षेत्र से ममता बनर्जी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला हुआ था।

अब उपचुनाव के दौरान कांग्रेस को मिले समर्थन ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है।

रिपोर्टों के अनुसार, नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर कांग्रेस और टीएमसी के बीच संभावित समझौते की चर्चा थी। कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से दावा किया गया था कि टीएमसी ने सीट को लेकर प्रस्ताव दिया था, जबकि टीएमसी ने इस तरह के किसी औपचारिक प्रस्ताव से इनकार किया।

इस बीच टीएमसी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने एक इंटरव्यू में कांग्रेस के साथ मजबूत गठबंधन नहीं बन पाने के कारणों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर कई मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं।

कल्याण बनर्जी ने बताया कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी और कांग्रेस की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं हैं। राज्य स्तर पर दोनों दल कई सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं, जिसके कारण गठबंधन की राह आसान नहीं रही।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी गठबंधन के लिए आपसी विश्वास और सीटों को लेकर सहमति जरूरी होती है। अगर दोनों पक्षों के बीच रणनीति और चुनावी तालमेल को लेकर स्पष्टता नहीं बनती है तो मजबूत गठबंधन करना मुश्किल हो जाता है।

नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर कांग्रेस और टीएमसी के बीच संभावित तालमेल की चर्चा के पीछे विपक्षी राजनीति के समीकरण भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। दोनों दल राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन की राजनीति का हिस्सा रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में उनके बीच स्थानीय राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।

ममता बनर्जी की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के बाद अब चुनावी मुकाबले पर इसका असर देखने को मिलेगा। हालांकि चुनाव परिणाम पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नंदीग्राम जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर छोटे-छोटे राजनीतिक फैसले भी व्यापक संदेश देते हैं। ममता बनर्जी का समर्थन और गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाएं विपक्षी एकजुटता के सवालों को फिर से चर्चा में ले आई हैं।

टीएमसी और कांग्रेस के बीच संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। दोनों दल कई मौकों पर केंद्र की राजनीति में साथ दिखाई दिए हैं, लेकिन बंगाल में संगठनात्मक स्तर पर दोनों की अलग-अलग रणनीतियां रही हैं।

कल्याण बनर्जी के बयान से यह संकेत मिलता है कि गठबंधन को लेकर केवल चुनावी गणित ही नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां भी बड़ी भूमिका निभाती हैं। दोनों दलों के नेताओं के बीच विचारों में अंतर और सीटों को लेकर सहमति नहीं बनना इसकी प्रमुख वजहों में शामिल बताया जा रहा है।

फिलहाल नंदीग्राम उपचुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्र बना हुआ है। कांग्रेस को मिले टीएमसी समर्थन और गठबंधन को लेकर उठे सवालों के बीच अब सभी की नजर चुनावी नतीजों और आगे के राजनीतिक समीकरणों पर है।

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