पश्चिम बंगाल

SIR विवाद पर ममता बनर्जी आक्रामक, विपक्षी एकता के लिए CPM से भी शुरू की बातचीत

Kavita2
27 Sept 2026 10:29 AM IST
SIR विवाद पर ममता बनर्जी आक्रामक, विपक्षी एकता के लिए CPM से भी शुरू की बातचीत
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कोलकाता। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जारी विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भाजपा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना राजनीतिक हमला तेज कर दिया है। ममता अब इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रही हैं। इसी क्रम में उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से टीएमसी की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी रही सीपीआई(एम) के नेतृत्व से भी बातचीत की है।

ममता बनर्जी ने शनिवार को हुगली जिले के श्रीरामपुर में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग और भाजपा पर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के जरिए पश्चिम बंगाल में भाजपा को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। चुनाव आयोग और भाजपा ने इन आरोपों से अलग रुख रखा है और चुनाव आयोग ने SIR से संबंधित अपने फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

ममता बनर्जी ने इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनका विरोध जारी रहेगा। ममता की यह मांग विपक्ष की व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनती दिखाई दे रही है, क्योंकि अन्य विपक्षी दल भी चुनाव आयोग और SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

चुनाव आयोग के भीतर SIR से संबंधित कुछ फैसलों को लेकर मतभेद की मीडिया रिपोर्टों के बाद विपक्ष की सक्रियता बढ़ी है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में कम से कम 14 मौकों पर SIR से जुड़े विभिन्न निर्णयों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने इन नोट्स को अपनी निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

इसी विवाद के बीच ममता बनर्जी ने विपक्षी एकता पर जोर बढ़ा दिया है। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बातचीत की और विपक्षी दलों की जल्द बैठक बुलाने की जरूरत बताई। ममता ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी को संदेश भेजकर कहा कि सभी विपक्षी दलों को एक साथ बैठकर चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर रणनीति बनानी चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम टीएमसी और सीपीआई(एम) के बीच बातचीत का है। पश्चिम बंगाल में दोनों दल दशकों से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। इसके बावजूद चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर ममता बनर्जी और सीपीआई(एम) महासचिव एम.ए. बेबी के बीच फोन पर बातचीत हुई है।

एम.ए. बेबी ने इससे पहले विपक्षी दलों को पत्र लिखकर चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम पर संयुक्त चर्चा की जरूरत बताई थी। इसके बाद ममता बनर्जी ने उनके साथ बातचीत की और विपक्षी दलों की साझा बैठक जल्द बुलाने पर सहमति जताई। इस घटनाक्रम को चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच बढ़ते समन्वय के रूप में देखा जा रहा है।

ममता ने श्रीरामपुर की सभा में कहा कि किसी साझा मुद्दे पर संघर्ष करते समय राजनीतिक दलों के वैचारिक मतभेद बाधा नहीं बनने चाहिए। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक रंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका ध्यान इस बात पर रहेगा कि मुद्दा क्या है, न कि उसे उठाने वाला दल कौन है।

इसी दौरान ममता बनर्जी ने केंद्र की भाजपा सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्होंने बंगाल लिया है तो विपक्ष दिल्ली लेगा। यह बयान उनकी राजनीतिक चुनौती और विपक्षी एकता के आह्वान के संदर्भ में दिया गया। इसे भविष्य के चुनावी नतीजे की भविष्यवाणी के बजाय ममता की राजनीतिक घोषणा के रूप में देखा जाना चाहिए।

ममता की सक्रियता के बीच INDIA गठबंधन के नेताओं की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होने की संभावना है। प्रस्तावित बैठक में चुनाव आयोग, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद जताई गई है।

विपक्ष के कुछ दल मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग भी कर रहे हैं। सीपीआई(एम), सीपीआई और सीपीआई(एमएल)-लिबरेशन ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग उठाई है। विपक्षी दल संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से संबंधित नया नोटिस लाने की संभावना पर भी विचार कर रहे हैं।

ममता बनर्जी की रणनीति में सीपीआई(एम) के साथ बातचीत खास राजनीतिक महत्व रखती है। पश्चिम बंगाल में वाम दल और तृणमूल कांग्रेस लंबे समय तक एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। लेकिन चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर दोनों पक्षों के शीर्ष नेताओं के बीच संवाद शुरू हुआ है। हालांकि इसका अर्थ राज्य की राजनीति में किसी औपचारिक गठबंधन से नहीं लगाया जा सकता। फिलहाल बातचीत चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर विपक्षी समन्वय तक सीमित बताई जा रही है।

ममता ने अपने भाषण में भाजपा और चुनाव आयोग के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि SIR के जरिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए और इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हुई। ये ममता बनर्जी के आरोप हैं। चुनाव आयोग ने अपनी ओर से कहा है कि SIR से संबंधित फैसले आयोग की निर्णय प्रक्रिया के तहत लिए गए।

अब राजनीतिक नजर 30 सितंबर की प्रस्तावित विपक्षी बैठक पर है। इसमें विभिन्न विपक्षी दल चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर आगे की साझा रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं। बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा कि विपक्ष किन कदमों पर सहमति बनाता है।

फिलहाल ममता बनर्जी ने यह संकेत दे दिया है कि चुनाव आयोग और SIR का मुद्दा उनके आगामी राजनीतिक अभियान के केंद्र में रहेगा। राहुल गांधी और एम.ए. बेबी से उनकी बातचीत तथा INDIA गठबंधन की बैठक की तैयारी से विपक्षी दलों के बीच इस विषय पर समन्वय बढ़ता दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर चुनाव आयोग अपने फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर अपना पक्ष सामने रख चुका है। ऐसे में SIR और चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद आने वाले दिनों में भी राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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