पश्चिम बंगाल

रातभर बिना सुरक्षा रहीं ममता: TMC

Saba Naaz
18 Jun 2026 10:02 PM IST
रातभर बिना सुरक्षा रहीं ममता: TMC
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पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर तनाव बढ़ गया है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि ममता बनर्जी के पुराने सुरक्षाकर्मियों को हटाकर उन्हें खतरे में डाला जा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था पुलिस तय करती है।

सुरक्षा कर्मियों में बदलाव पर विवाद

टीएमसी का आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लंबे समय से तैनात सुरक्षाकर्मियों को हटाया गया है। इससे पार्टी में नाराजगी है। वहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि सुरक्षा में तैनाती का निर्णय पुलिस प्रशासन का होता है और इसमें किसी व्यक्ति की पसंद-नापसंद शामिल नहीं होती।

टीएमसी का आरोप: राजनीतिक प्रतिशोध

टीएमसी नेताओं ने इस कदम को ‘राजनीतिक प्रतिशोध की भावना का नया निचला स्तर’ बताया है। पार्टी ने दावा किया कि यह ममता बनर्जी को अलग-थलग करने और उन्हें खतरे में डालने की सोची-समझी कोशिश है। टीएमसी ने सोशल मीडिया पर भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की है।

डेरेक ओब्रायन का दावा

टीएमसी नेता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा कि ममता बनर्जी की सुरक्षा में लंबे समय से तैनात निजी सुरक्षा अधिकारियों को हटाया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कालीघाट स्थित आवास पर देर रात कोई सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

सागरिका घोष की प्रतिक्रिया

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा सरकार की संस्थागत जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि अचानक पुराने सुरक्षाकर्मियों को क्यों हटाया गया और क्या उन्हें बिना सुरक्षा के रखा गया।

सरकार का पक्ष

सरकारी पक्ष का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था तय करना पुलिस का अधिकार है और इसमें किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप का सवाल नहीं है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अनुसार, सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती नियमों के अनुसार की जाती है और किसी की व्यक्तिगत पसंद पर नहीं। ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर उठे इस विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। टीएमसी और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जहां एक ओर टीएमसी इसे राजनीतिक साजिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।

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