पश्चिम बंगाल

Mamata Banerjee ने बेदखली अभियान को बताया ‘बुलडोजर पॉलिटिक्स’, गरीबों पर असर को लेकर जताई चिंता

Kavita2
18 May 2026 10:38 AM IST
Mamata Banerjee ने बेदखली अभियान को बताया ‘बुलडोजर पॉलिटिक्स’, गरीबों पर असर को लेकर जताई चिंता
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West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने राज्य के कुछ हिस्सों में हाल ही में चलाए गए बेदखली और अतिक्रमण विरोधी अभियानों को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इन कार्रवाइयों को “बुलडोजर पॉलिटिक्स” करार देते हुए कहा कि इनका सबसे ज्यादा असर गरीब और आम लोगों पर पड़ रहा है।

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में ममता बनर्जी ने दावा किया कि इन अभियानों के कारण कई इलाकों में अशांति का माहौल बना है और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों से लोगों की आजीविका और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

ममता बनर्जी ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि ऐसे कदम राजनीतिक दबाव और “राजनीतिक घमंड” के कारण उठाए जा रहे हैं, जिसका खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है जो पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को बिना पर्याप्त विकल्प दिए हटाया जाना न्यायसंगत नहीं है।

टीएमसी प्रमुख के अनुसार, राज्य में चल रही इन बेदखली कार्रवाइयों ने कई क्षेत्रों में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि किसी भी कार्रवाई से पहले मानवीय पहलुओं पर ध्यान दिया जाए और प्रभावित लोगों के पुनर्वास की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

इस बीच, राज्य सरकार या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से ममता बनर्जी के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को कानून व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में बहस को तेज कर दिया है। एक ओर जहां सरकार इसे अवैध कब्जों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई बता रही है, वहीं विपक्ष इसे गरीबों के खिलाफ सख्त कदम के रूप में पेश कर रहा है।

स्थानीय लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोग अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को सही ठहरा रहे हैं, जबकि कई लोग प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी की संभावना जताई जा रही है।

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