पश्चिम बंगाल

Malda: भाजपा सदस्य के वोट न देने से पलटा समीकरण, प्रधान बचीं

Admindelhi1
6 Aug 2026 12:00 PM IST
Malda: भाजपा सदस्य के वोट न देने से पलटा समीकरण, प्रधान बचीं
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हरिश्चंद्रपुर पंचायत में सियासी संकट टला, प्रधान पद बरकरार

मालदा: कुशिदा ग्राम पंचायत की प्रधान शमीमा परवीन अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहीं।

बुधवार को चांचल महकमा के हरिश्चंद्रपुर-1 ब्लॉक स्थित कुशिदा ग्राम पंचायत में बोर्ड गठन और अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भारी राजनीतिक तनाव और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पंचायत कार्यालय परिसर में बीएनएस की धारा 163 लागू की गई थी और बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी।

पंचायत सूत्रों के अनुसार, 28 सीटों वाली इस पंचायत में तृणमूल कांग्रेस के नौ, कांग्रेस के छह, माकपा के पांच और भाजपा व निर्दलीय के चार-चार सदस्य हैं। चुनाव के बाद माकपा की शमीमा परवीन प्रधान बनी थी, लेकिन बाद में अधिकांश सदस्य तृणमूल में शामिल होने से बोर्ड तृणमूल के कब्जे में आ गया।

हाल ही में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन ने प्रधान को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया, जिसमें तृणमूल के एक धड़े, माकपा और भाजपा के कुछ सदस्य भी शामिल थे।

आरोप है कि बहुमत सुनिश्चित करने के लिए एक गिरफ्तार भाजपा सदस्य शंकर चंद्र राय को अदालत की अनुमति से अविश्वास बैठक में लाया गया था। विपक्षी सदस्यों का आरोप है कि शंकर चंद्र राय ने बैठक में पहुंचकर अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया। इसके तुरंत बाद उन्हें किसी अधिकारी द्वारा बाहर बुलाकर कथित रूप से हटा दिया गया, जिससे प्रस्ताव गिर गया। इसके चलते शमीमा परवीन प्रधान पद पर बनी रहीं।

इस घटना के बाद विपक्षी सदस्य और समर्थक भड़क उठे और प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए पंचायत कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। अविश्वास प्रस्ताव के समर्थक सदस्य साकिब अली ने कहा कि अदालत के निर्देश के बावजूद शंकर को बैठक से बाहर ले जाना संदिग्ध है। पूरे मामले की सीसीटीवी जांच होनी चाहिए। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शंकर चंद्र राय ने स्वयं ही प्रीसाइडिंग अधिकारी को सूचित किया था कि वह मतदान में भाग नहीं लेंगे। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।

वहीं, प्रधान शमीमा परवीन ने कहा कि मतदान करना या न करना पूरी तरह व्यक्तिगत अधिकार है और शंकर ने क्यों मतदान नहीं किया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर हरिश्चंद्रपुर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

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