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कोलकाता पुलिस को बड़ी सफलता, माओवादी दंपति मंगल-मालती ने किया आत्मसमर्पण

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच कोलकाता पुलिस को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को माओवादी दंपति मंगल और मालती ने कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार में पुलिस आयुक्त अजय नंद के सामने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया। इस दौरान दोनों ने एक एके-47 और एक इंसास राइफल पुलिस को सौंपी। पुलिस के अनुसार, दोनों लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों से जुड़े रहे हैं और झारखंड के सारंडा जंगल क्षेत्र में सक्रिय थे। मंगल के माओवादी नेता किशनजी से करीबी संबंध होने की जानकारी भी सामने आई है। दोनों के मुख्यधारा में लौटने के फैसले को पुलिस माओवादी नेटवर्क के खिलाफ चल रहे अभियानों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मान रही है।
लालबाजार पुलिस मुख्यालय में हुआ आत्मसमर्पण
शुक्रवार को कोलकाता के लालबाजार स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान माओवादी दंपति मंगल और मालती ने आत्मसमर्पण की औपचारिकता पूरी की।
कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद ने पत्रकार वार्ता में दोनों के आत्मसमर्पण की जानकारी दी।
इस दौरान मंगल और मालती ने अपने पास मौजूद आधुनिक हथियार पुलिस अधिकारियों को सौंपे।
पुलिस के अनुसार, दोनों के माओवादी संगठन से लंबे समय तक संबंध रहे हैं। वे पश्चिम बंगाल से निकलकर झारखंड के जंगलों में सक्रिय हो गए थे।
पुलिस का कहना है कि हाल के महीनों में सुरक्षा अभियानों और बदलती परिस्थितियों के कारण कई माओवादी सदस्यों ने संगठन से अलग होने का रास्ता चुना है।
पांच और दो लाख रुपये का घोषित था इनाम
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मंगल और मालती पर अलग-अलग इनाम घोषित थे।
मंगल पर पांच लाख रुपये और मालती पर दो लाख रुपये का इनाम बताया गया है।
दोनों का संबंध प्रतिबंधित माओवादी संगठन से रहा है और वे लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में थे।
बताया जा रहा है कि मंगल पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के शालबनी क्षेत्र का निवासी है, जबकि मालती झाड़ग्राम जिले के गोपीबल्लभपुर क्षेत्र की रहने वाली है।
इनकी गतिविधियां बाद में झारखंड के दलमा और सारंडा के जंगलों तक फैल गई थीं।
किशनजी का करीबी सहयोगी रहा मंगल
पुलिस से जुड़ी जानकारी के अनुसार, मंगल का संबंध कभी माओवादी नेता किशनजी से रहा था।
किशनजी, जिनका वास्तविक नाम मल्लोजुला कोटेश्वर राव था, पूर्वी भारत में माओवादी संगठन के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे।
पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के विस्तार के दौरान किशनजी की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
नवंबर 2011 में पश्चिम मेदिनीपुर जिले के बुरीशोल जंगल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ के दौरान किशनजी मारे गए थे।
बताया जा रहा है कि इसके बाद मंगल ने झारखंड की ओर अपना ठिकाना बदल लिया था।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2011-12 के आसपास वह झारखंड चला गया और वहां माओवादी गतिविधियों से जुड़ा रहा।
सारंडा के जंगलों में लंबे समय तक रहे सक्रिय
मंगल और मालती की गतिविधियां मुख्य रूप से झारखंड के सारंडा जंगलों से जुड़ी रही हैं।
यह इलाका घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है।
पुलिस के अनुसार, मंगल पहले दलमा क्षेत्र में सक्रिय था। बाद में उसने सारंडा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों से जुड़े काम संभाले।
कुछ समय बाद मालती भी सारंडा पहुंच गई और संगठन की गतिविधियों से जुड़ गई।
सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों के कारण हाल के महीनों में इस क्षेत्र में माओवादी संगठन की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
झारखंड में दर्ज हैं कई आपराधिक मामले
कोलकाता पुलिस आयुक्त के अनुसार, मंगल के खिलाफ झारखंड में लगभग छह से सात आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी है।
इन मामलों की विस्तृत प्रकृति और वर्तमान न्यायिक स्थिति की जानकारी संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।
पुलिस के मुताबिक, मंगल और मालती लंबे समय तक प्रतिबंधित संगठन से जुड़े रहे।
सुरक्षा एजेंसियां अब उनके पुराने संपर्कों और गतिविधियों से जुड़ी जानकारी का आकलन कर सकती हैं।
हालांकि, आत्मसमर्पण करने का अर्थ यह नहीं है कि पहले से दर्ज आपराधिक मामले स्वतः समाप्त हो जाएंगे। संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई लागू कानूनों और पुनर्वास नीति के अनुसार होगी।
एके-47 और इंसास राइफल पुलिस को सौंपी
आत्मसमर्पण के दौरान दंपति ने पुलिस के सामने आधुनिक हथियार भी जमा किए।
इनमें एक एके-47 और एक इंसास राइफल शामिल है।
इन हथियारों का इस्तेमाल माओवादी संगठन के सशस्त्र दस्तों में किया जाता रहा है।
हथियारों को पुलिस के हवाले करना आत्मसमर्पण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बरामद हथियारों की तकनीकी जांच से उनके पुराने इस्तेमाल या किसी आपराधिक घटना से संभावित संबंध की पड़ताल की जा सकती है।
हालांकि, शुक्रवार के कार्यक्रम में सौंपे गए कारतूसों की निश्चित संख्या की विश्वसनीय पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए केवल प्रमाणित हथियारों का विवरण देना उचित होगा।
मंगल ने कहा- हिंसा से नहीं बदलेगा समाज
आत्मसमर्पण के बाद मंगल ने हथियार छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने की इच्छा जताई।
उसने कहा कि सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से समाज में बदलाव लाना संभव नहीं है।
मंगल ने बताया कि इसी सोच के कारण उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ने और समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
उसने पश्चिम बंगाल सरकार के सामने आत्मसमर्पण करके नई शुरुआत करने की इच्छा व्यक्त की।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ऐसे फैसले जंगलों में सक्रिय दूसरे माओवादी सदस्यों को भी आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
सुरक्षा अभियानों से माओवादी नेटवर्क पर दबाव
झारखंड के सारंडा और आसपास के जंगलों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, इन कार्रवाइयों के कारण जंगलों में सक्रिय माओवादी सदस्यों के लिए संगठनात्मक गतिविधियां जारी रखना कठिन हुआ है।
कोलकाता पुलिस आयुक्त ने बताया कि वर्ष 2026 के दौरान सारंडा क्षेत्र से पश्चिम बंगाल मूल के कई माओवादी सदस्य बाहर निकले हैं।
इनमें से कुछ को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ ने आत्मसमर्पण किया है।
पुलिस के अनुसार, पश्चिम बंगाल से संबंधित लगभग 13 माओवादी सदस्यों के इस क्षेत्र को छोड़ने की जानकारी सामने आई थी।
पहले भी माओवादियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
पश्चिम बंगाल में हाल के महीनों में माओवादी संगठन से जुड़े कई लोगों ने आत्मसमर्पण किया है।
जून 2026 में महिला माओवादी पुष्पा उर्फ शकुंतला ने कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था।
वह लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों से जुड़ी रही थी और झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय थी।
सितंबर में बांकुड़ा जिले में भी तीन वरिष्ठ माओवादी सदस्यों ने हथियारों के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था।
इन घटनाओं को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठन के घटते प्रभाव के संदर्भ में देख रही हैं।
पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी पर जोर
माओवादी सदस्यों के आत्मसमर्पण के बाद उनके पुनर्वास की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।
राज्य सरकारों की निर्धारित नीतियों के अनुसार पात्र व्यक्तियों को पुनर्वास संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
इनका उद्देश्य हिंसक गतिविधियों से अलग हुए लोगों को रोजगार, प्रशिक्षण और सामान्य सामाजिक जीवन की ओर लौटने में सहायता देना है।
हालांकि, मंगल और मालती को किस प्रकार की सहायता प्रदान की जाएगी, इसकी विस्तृत आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
दोनों के खिलाफ लंबित मामलों और पुनर्वास संबंधी पात्रता का आकलन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
पुलिस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा आत्मसमर्पण
मंगल और मालती का आत्मसमर्पण पश्चिम बंगाल तथा झारखंड में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
लंबे समय तक जंगलों में सक्रिय रहे दंपति द्वारा हथियार सौंपने से प्रतिबंधित संगठन को एक और झटका लगा है।
इससे सुरक्षा एजेंसियों को पुराने नेटवर्क और संगठन की गतिविधियों को समझने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, आत्मसमर्पण के बाद मिलने वाली जानकारी की पुष्टि स्वतंत्र जांच और साक्ष्यों के आधार पर करना आवश्यक होगा।
हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन की ओर कदम
शुक्रवार को कोलकाता पुलिस मुख्यालय में हुए इस घटनाक्रम ने माओवादी संगठन से जुड़े लोगों के पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।
मंगल और मालती ने आधुनिक हथियार सौंपकर सशस्त्र गतिविधियों से अलग होने का फैसला जताया है।
पुलिस के अनुसार, दोनों झारखंड के सारंडा क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे और उनके खिलाफ गंभीर आरोपों से संबंधित जांच तथा मामले मौजूद हैं।
अब उनकी कानूनी स्थिति और पुनर्वास प्रक्रिया से संबंधित आगे के निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।





