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महुआ मोइत्रा का आरोप: नादिया सर्किट हाउस खाली करने का मिला आदेश

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने शुक्रवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के प्रशासन ने उन्हें देर रात स्थानीय सर्किट हाउस खाली करने का आदेश दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संपत्ति में ठहरने के लिए कमरा आवंटित होने के बावजूद उन्हें वहां से जाने के लिए कहा गया।
महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट के जरिए यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि संसद सत्र के बाद रातभर रुकने के लिए वह राज्य सरकार के स्वामित्व वाले सर्किट हाउस में ठहरी थीं। उनके अनुसार, उन्हें पहले इस संपत्ति में कमरा आवंटित किया गया था।
रात में खाली करने का मिला आदेश
टीएमसी सांसद ने दावा किया कि देर रात उन्हें प्रशासन की ओर से सर्किट हाउस खाली करने के लिए कहा गया। उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और कहा कि एक निर्वाचित सांसद के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया।
उन्होंने कहा कि वह एक जनप्रतिनिधि हैं और सरकारी नियमों के तहत उन्हें कमरा आवंटित किया गया था। इसके बावजूद उन्हें अचानक वहां से जाने के लिए कहा गया।
हालांकि, प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बाहर जुटी भीड़ का किया दावा
महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने तुरंत परिसर छोड़ने से इनकार किया तो सर्किट हाउस के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। उन्होंने दावा किया कि भीड़ की ओर से ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए जा रहे थे।
उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में जवाब मांगा।
राजनीतिक विवाद बढ़ने के संकेत
इस घटना के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है। टीएमसी नेताओं ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं और इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया है।
वहीं, विपक्षी दलों की ओर से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पहले भी कई मुद्दों को लेकर सामने आते रहे हैं।
सांसद ने जताई नाराजगी
महुआ मोइत्रा ने अपनी पोस्ट में घटना को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों का उपयोग नियमों के अनुसार होता है और यदि किसी तरह की आपत्ति थी तो प्रशासन को पहले जानकारी देनी चाहिए थी।
सर्किट हाउस आवंटन पर उठे सवाल
इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि जब सांसद को कमरा आवंटित किया गया था तो बाद में उसे खाली करने के लिए क्यों कहा गया। प्रशासनिक स्तर पर इस संबंध में क्या प्रक्रिया अपनाई गई, यह भी जांच का विषय है।
सर्किट हाउस आमतौर पर सरकारी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और विशिष्ट अतिथियों के ठहरने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इनके आवंटन की अपनी निर्धारित प्रक्रिया होती है।
सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी
महुआ मोइत्रा ने घटना की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक की। उन्होंने अपनी पोस्ट में खुद को एक मां और जनप्रतिनिधि बताते हुए घटना पर सवाल उठाए।
उनकी पोस्ट के बाद समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच प्रतिक्रिया देखने को मिली। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
आगे प्रशासन के जवाब का इंतजार
फिलहाल इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से विस्तृत बयान का इंतजार है। प्रशासन यदि कोई स्पष्टीकरण जारी करता है तो घटना की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर पहले से ही तीखी राजनीतिक लड़ाई चल रही है।
महुआ मोइत्रा के आरोपों के बाद अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या कोई आधिकारिक जांच की जाती है।





