पश्चिम बंगाल

बागी गुट के कार्यक्रम में कुणाल घोष ममता की बढ़ी चिंता

Ratna Netam
15 Aug 2026 9:09 PM IST
बागी गुट के कार्यक्रम में कुणाल घोष ममता की बढ़ी चिंता
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कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के प्रबल समर्थक माने जाने वाले पार्टी विधायक कुणाल घोष शनिवार को स्वतंत्रता दिवस पर टीएमसी के दोनों गुटों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट गुट के कार्यक्रम के बाद वह ऋतब्रत बनर्जी के विरोधी खेमे के आयोजन में भी पहुंच गए। इसके बाद पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में उनके भावी कदम को लेकर अटकलें शुरू हो गईं।
कुणाल घोष ने सबसे पहले दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित तृणमूल कांग्रेस के पुराने कार्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लिया। उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के निर्देश पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस दौरान पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। राष्ट्रगान के साथ स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई।
कालीघाट के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद कुणाल घोष बेलेघाटा के मेट्रोपॉलिटन इलाके में स्थित टीएमसी के किराए के कार्यालय पहुंचे। यहां ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विरोधी गुट ने अलग स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम आयोजित किया था। यह इलाका कुणाल घोष के विधानसभा क्षेत्र में आता है।
शहीद स्मारक पर अर्पित किए पुष्प
ऋतब्रत गुट के कार्यक्रम में पहुंचने के बाद कुणाल घोष ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं को संक्षिप्त रूप से संबोधित भी किया। कार्यक्रम में चंद्रिमा भट्टाचार्य, अरूप रॉय और बिप्लब मित्रा समेत विरोधी खेमे के कई प्रमुख नेता मौजूद थे।
ममता बनर्जी के समर्थन में लगातार मुखर रहने वाले कुणाल घोष की दूसरे गुट के कार्यक्रम में उपस्थिति ने सभी को चौंका दिया। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या वह ऋतब्रत गुट के साथ संवाद बनाए रखना चाहते हैं या आने वाले समय में कोई बड़ा राजनीतिक निर्णय ले सकते हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आई है। एक तरफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला कालीघाट खेमा है, जबकि दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले नेता पार्टी संगठन और विधानसभा में अपनी अलग मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम, संगठन और राजनीतिक अधिकार को लेकर विवाद बना हुआ है।
ऋतब्रत गुट ने किया शामिल होने का दावा
ऋतब्रत गुट के प्रवक्ता कोहिनूर मजूमदार ने कुणाल घोष की उपस्थिति को अपने खेमे के लिए सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि कुणाल घोष कार्यक्रम में आए हैं और इसे दूसरे गुट में प्रवेश की शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है।
मजूमदार ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कुणाल घोष ने फिलहाल उनके दरवाजे की घंटी बजाई है और कुछ समय बाद वह अपना सामान लेकर आ सकते हैं। उनके इस बयान से कुणाल के संभावित राजनीतिक बदलाव की अटकलों को और बल मिला।
ऋतब्रत बनर्जी ने भी कुछ दिन पहले दावा किया था कि कुणाल घोष उनके संपर्क में हैं। हालांकि, कुणाल इससे पहले विरोधी खेमे और उसके नेताओं पर भाजपा के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने का आरोप लगाते रहे हैं।
कुणाल घोष ने अटकलों को किया खारिज
कुणाल घोष ने दूसरे खेमे में जाने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि विरोधी गुट के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी का राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे के साथ हैं और उन्होंने किसी तरह का पक्ष परिवर्तन नहीं किया है।
अपनी उपस्थिति का कारण बताते हुए घोष ने कहा कि वह कालीघाट में आयोजित मुख्य स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से लौट रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि उनके विधानसभा क्षेत्र स्थित कार्यालय में कुछ लोग तृणमूल कांग्रेस के नाम पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा रहे हैं। चूंकि कार्यक्रम उनके निर्वाचन क्षेत्र में हो रहा था, इसलिए वह वहां रुक गए।
कुणाल घोष ने कहा कि वह यह देखकर कार्यक्रम में शामिल हुए कि लोग उनकी पार्टी के नाम पर तिरंगा फहरा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी उपस्थिति केवल स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़ी थी। इसका मतलब यह नहीं है कि वह ममता बनर्जी का साथ छोड़ रहे हैं।
पहले भी दोनों गुटों में हो चुका है टकराव
कुणाल घोष पहले ऋतब्रत बनर्जी गुट के खिलाफ कई तीखे बयान दे चुके हैं। जुलाई में पश्चिम बंगाल विधानसभा में दोनों गुटों के विधायकों के बीच विवाद हुआ था। इस दौरान कुणाल घोष को सदन से बाहर कर दिया गया और शेष अवधि के लिए निलंबित किए जाने की खबर सामने आई थी।
ममता समर्थक नेताओं ने ऋतब्रत गुट पर समानांतर संगठन चलाने और पार्टी के नाम तथा प्रतीक का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए पुलिस और निर्वाचन आयोग का दरवाजा भी खटखटाया है। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में कुणाल घोष का विरोधी गुट के कार्यक्रम में जाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने फिलहाल साफ कर दिया है कि उनका खेमा बदलने का कोई इरादा नहीं है।
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