पश्चिम बंगाल

Kolkata: बंगाल सरकार ने नगर निकायों में प्रशासनिक बदलाव किए

Admindelhi1
20 May 2026 12:22 PM IST
Kolkata: बंगाल सरकार ने नगर निकायों में प्रशासनिक बदलाव किए
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल नगर मामलों के विभाग ने मंगलवार को उत्तर बंगाल के चार शहरी निकायों के बोर्ड भंग करने की घोषणा की। इन निकायों पर लंबे समय तक चुनाव कराए बिना प्रशासनिक बोर्ड के माध्यम से अवैध रूप से संचालन करने के आरोप लग रहे थे।

राज्य सरकार ने इन नगर निकायों का प्रशासनिक नियंत्रण अस्थायी रूप से नौकरशाह प्रशासकों को सौंप दिया है। नई व्यवस्था के तहत संबंधित उपमंडलाधिकारी (एसडीओ) इन निकायों का कामकाज संभालेंगे, जब तक कि नए चुनाव कराकर नई बोर्ड समितियों का गठन नहीं हो जाता।

नगर मामलों के विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह फैसला राज्यपाल आर. एन. रवि के कार्यालय की सलाह के बाद लिया गया।

जिन चार निकायों के बोर्ड भंग किए गए हैं, उनमें दार्जिलिंग जिले के कर्सियांग नगरपालिका, मिरिक नोटिफाइड एरिया अथॉरिटी और कालिम्पोंग नगरपालिका शामिल हैं। चौथा निकाय दक्षिण दिनाजपुर जिले की बुनियादपुर नगरपालिका है।

सरकार ने गंगारामपुर के एसडीओ को बुनियादपुर नगरपालिका का प्रशासक नियुक्त किया है। वहीं कर्सियांग, मिरिक और कालिम्पोंग के एसडीओ क्रमशः कर्सियांग नगरपालिका, मिरिक नोटिफाइड एरिया अथॉरिटी और कालिम्पोंग नगरपालिका के प्रशासक बनाए गए हैं।

कर्सियांग नगरपालिका, मिरिक नोटिफाइड एरिया अथॉरिटी और कालिम्पोंग नगरपालिका के लिए आखिरी बार मई 2017 में चुनाव हुए थे। उस समय तृणमूल कांग्रेस और उसके स्थानीय पहाड़ी सहयोगियों ने इन निकायों पर नियंत्रण हासिल किया था।

हालांकि अप्रैल 2022 में इन बोर्डों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी राज्य सरकार ने चुनाव नहीं कराए। इसके बजाय तत्कालीन बोर्ड अध्यक्षों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया गया था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि इस व्यवस्था के जरिए नगर निकायों की शक्तियां परोक्ष रूप से सत्तारूढ़ दल के हाथों में बनी हुई थीं।

इसी तरह बुनियादपुर नगरपालिका के गठन के बाद अगस्त 2017 में चुनाव हुए थे। लेकिन सितंबर 2022 में बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के बावजूद वहां भी चुनाव नहीं कराए गए और पूर्व चेयरमैन को ही प्रशासक बना दिया गया।

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने अब ऐसे निकायों के बोर्ड भंग कर प्रशासनिक नियंत्रण नौकरशाहों को सौंपने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था नए चुनाव होने तक जारी रहेगी।

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