पश्चिम बंगाल

Kolkata: ममता के ‘सब जानती हूं’ वाले अंदाज पर शुभेंदु का तंज, सहकारिता पर दिया संदेश

Admindelhi1
1 Sept 2026 12:54 PM IST
Kolkata: ममता के ‘सब जानती हूं’ वाले अंदाज पर शुभेंदु का तंज, सहकारिता पर दिया संदेश
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ममता पर शुभेंदु का कटाक्ष, सहकारिता मजबूत करने को बताया जरूरी

कोलकाता: ‘सहकारिता ही वैकल्पिक अर्थव्यवस्था है। सहकारिता मजबूत होगी तो आर्थिक विकास के नए रास्ते खुलेंगे।’ सोमवार को मध्यग्राम में महिला संचालित सहकारी समिति के कार्यक्रम में शामिल होकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने पिछले 15 वर्षों में सहकारिता क्षेत्र की कथित उपेक्षा को लेकर पूर्ववर्ती सरकार और ममता बनर्जी पर निशाना साधा।

शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “समझाने पर भी नहीं समझती थीं। कहती थीं कि मैं तो सब जानती हूं। और मैं कहता हूं कि मैं कुछ जानता हूं, लेकिन बहुत कुछ अभी सीख रहा हूं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता आंदोलन एक व्यापक आर्थिक आंदोलन है और पश्चिम बंगाल में इसे और मजबूत करने की जरूरत है। सहकारिता के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और महिलाओं का सशक्तीकरण भी होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में सहकारिता क्षेत्र की उपेक्षा हुई। उनके अनुसार, पिछली सरकार ने सहकारिता की वास्तविक भूमिका को समझने की कोशिश नहीं की। स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक से लेकर प्राथमिक सहकारी समितियों तक में कई वर्षों तक चुनाव नहीं हुए और सहकारिता क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वर्तमान सरकार सहकारिता क्षेत्र को आगे ले जाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने सहकारी समिति के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को दो महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों में ऋण देने और ऋण वसूली के दौरान रिश्तेदारी और राजनीतिक संकीर्णता से दूर रहना होगा। रिश्तेदारी घर तक ही सीमित रखी जानी चाहिए।

उन्होंने प्रत्येक वर्ष सितंबर महीने के भीतर ऑडिट पूरा करने की भी सलाह दी।

शुभेंदु का दूसरा सुझाव सहकारी समितियों के मैनेजमेंट खर्च को कम करने को लेकर था। उन्होंने कहा कि अनावश्यक खर्च से बचना चाहिए। अतिथियों के स्वागत के नाम पर कई तरह के उपहार देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्वागत के लिए केवल एक चीज दी जाए—फूलों की डंडी, उत्तरीय या मातृमूर्ति।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के अनावश्यक खर्च का बोझ आखिरकार समिति के सदस्यों और संस्था के संसाधनों पर ही पड़ता है। उन्होंने सहकारी समितियों से खर्च कम कर आर्थिक रूप से मजबूत बनने का आह्वान किया।

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