पश्चिम बंगाल

Kolkata: छात्रविहीन और अतिरिक्त शिक्षक वाले स्कूलों के लिए बदले नियम

Admindelhi1
15 July 2026 1:17 PM IST
Kolkata: छात्रविहीन और अतिरिक्त शिक्षक वाले स्कूलों के लिए बदले नियम
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छात्रविहीन स्कूलों से शिक्षकों के स्थानांतरण की नई व्यवस्था शुरू

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी सहायता प्राप्त और प्रायोजित विद्यालयों में शिक्षकों के समान वितरण को सुनिश्चित करने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। नई व्यवस्था के तहत जिन विद्यालयों में एक भी छात्र नहीं है या आवश्यकता से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं, वहां के शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों का तबादला उन विद्यालयों में किया जाएगा, जहां शिक्षकों की कमी है।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों में शून्य नामांकन (जीरो एनरोलमेंट) है, वहां शिक्षकों और गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है। ऐसे सभी कर्मचारियों को जरूरत वाले विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसी तरह, जिन विद्यालयों में निर्धारित आवश्यकता से अधिक शिक्षक हैं, वहां से भी अतिरिक्त शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में भेजा जाएगा।

तबादले की प्रक्रिया छात्र-शिक्षक अनुपात (प्यूपिल-टीचर रेशियो) के आधार पर होगी। जिन विद्यालयों में एक शिक्षक पर छात्रों की संख्या अधिक है, उन्हें प्राथमिकता देते हुए वहां शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।

माध्यमिक विद्यालयों के लिए प्रत्येक जिले के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआई) और प्राथमिक विद्यालयों के लिए जिला प्राथमिक विद्यालय परिषद (डीपीएससी) शिक्षक-घाटे वाले विद्यालयों की सूची जारी करेंगे। इस सूची में विद्यालय का नाम, जिला, प्रखंड, आवश्यक शिक्षकों की संख्या तथा माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर विषयवार रिक्त पदों का विवरण भी शामिल रहेगा।

नई व्यवस्था के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में प्रधान शिक्षक को अतिरिक्त शिक्षक की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। हालांकि, सहायक शिक्षकों को आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त शिक्षक माना जा सकता है और उनका तबादला किया जा सकेगा।

एसओपी में यह भी कहा गया है कि यदि किसी छात्रविहीन विद्यालय से सभी शिक्षक और कर्मचारी स्थानांतरित कर दिए जाते हैं, तो उस विद्यालय की इमारत और अन्य संपत्तियों की जिम्मेदारी संबंधित उप विद्यालय निरीक्षक अस्थायी रूप से संभालेंगे। वे विद्यालय की संपत्तियों का पूरा विवरण उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे।

माध्यमिक स्तर के ऐसे विद्यालय, जहां छात्र नहीं हैं लेकिन स्वीकृत शिक्षक पद मौजूद हैं, वहां के स्वीकृत पद भी समाप्त कर उन्हें कम शिक्षक वाले विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा।

शिक्षा विभाग का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राज्य में उपलब्ध शिक्षकों का संतुलित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है, ताकि जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है वहां पढ़ाई प्रभावित न हो। हालांकि, शिक्षक संगठनों के एक वर्ग ने वरिष्ठता के आधार पर तबादले और अतिरिक्त शिक्षक तय करने की प्रक्रिया को लेकर भविष्य में विवाद की संभावना जताई है।

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