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Kolkata: सांप काटने के मामलों में राहत की पहल, बंगाल में एंटी स्नेक वेनम उत्पादन की कवायद

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) के उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में ही एंटी स्नेक वेनम के निर्माण के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। इस संबंध में स्वास्थ्य भवन में पहली उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की जा चुकी है।
स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार किसी सरकार ने पश्चिम बंगाल को एंटी स्नेक वेनम के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस पहल की है। उन्होंने कहा कि राज्य में पाए जाने वाले रसेल वाइपर (चंद्रबोड़ा) सहित अन्य विषैले सांपों के जहर की जैव-रासायनिक संरचना, एंजाइम गतिविधि और विषाक्तता दक्षिण भारत के सांपों से अलग होती है। ऐसे में दक्षिण भारत में तैयार एंटी स्नेक वेनम कई मामलों में अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा पाता।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की भौगोलिक और जैविक परिस्थितियों के अनुरूप एंटी स्नेक वेनम विकसित करना समय की आवश्यकता है। वर्तमान में राज्य को एंटी स्नेक वेनम की आपूर्ति के लिए तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। कई वर्षों से राज्य में इसका उत्पादन बंद होने के कारण समय पर उपलब्धता और आपूर्ति की समस्या भी बनी रहती है।
इस बीच, विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान दक्षिण 24 परगना जिले के भांगड़ से ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देश में सांप के काटने से होने वाली कुल मौतों में लगभग 19.7 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले पश्चिम बंगाल की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में देशभर में 55 हजार से अधिक लोग सांप के काटने का शिकार हुए।
नौशाद सिद्दीकी ने सुझाव दिया कि पहले एंटी स्नेक वेनम का उत्पादन करने वाली बंगाल केमिकल को दोबारा यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जिससे राज्य इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि पश्चिम बंगाल के स्थानीय विषैले सांपों के जहर के अनुरूप एंटी स्नेक वेनम का उत्पादन शुरू हो जाता है, तो मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी होगा। साथ ही, सांप के काटने से होने वाली मौतों में भी उल्लेखनीय कमी लाने में मदद मिलेगी।





