पश्चिम बंगाल

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की वाणिज्यिक योजना पर लगाई रोक

SHIDDHANT
1 Sept 2025 11:56 PM IST
सांकेतिक तस्वीर (AI)
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Kolkata कोलकाता : हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि फिलहाल अलीपुर स्थित ऐतिहासिक चिड़ियाघर की जमीन का वाणिज्यिक उपयोग नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति सुजय पॉल और न्यायमूर्ति स्मिता दास डे की खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 23 जुलाई को जारी किया गया टेंडर नोटिस अगली अदालत की सुनवाई तक अमल में नहीं लाया जाएगा। इस मामले की शुरुआत विपक्ष के नेता और भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी के आरोपों से हुई थी। उन्होंने दावा किया था कि राज्य सरकार अवैध रूप से अलीपुर चिड़ियाघर की लगभग 50 कट्ठा जमीन को बेचने का प्रयास कर रही है, वह भी मात्र 1,000 करोड़ रुपये की कीमत पर, जबकि यह जमीन कोलकाता के सबसे प्राइम लोकेशन में स्थित है।
इसी आरोप के खिलाफ जनवरी 2024 में भाजपा ने रवींद्र सदन से चिड़ियाघर तक एक विरोध मार्च भी निकाला था। इसके बावजूद राज्य सरकार ने एक टेंडर जारी कर चिड़ियाघर से सटे उस भूखंड को वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई, जहाँ वर्तमान में एक्वेरियम, सभागार, पशु चिकित्सालय और स्टाफ क्वार्टर स्थित हैं। इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ आम नागरिकों के बीच भी चिंता जताई गई थी। बाद में इस संबंध में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। उसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया कि अलीपुर चिड़ियाघर की जमीन का उपयोग किसी व्यावसायिक उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा जारी टेंडर नोटिस को भी अगले आदेश तक निलंबित रखा जाएगा।
अलीपुर चिड़ियाघर पहले से ही कई विवादों में घिरा हुआ है। हाल ही में यहाँ से 321 जानवरों के एक साथ लापता होने का मामला सामने आया था, जिसने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। विपक्ष का कहना है कि सरकार का ध्यान संरक्षण और प्रबंधन की जगह व्यावसायिक लाभ की ओर अधिक है, जिससे चिड़ियाघर और वन्यजीवों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। कोर्ट के इस आदेश के बाद सरकार को फिलहाल अपनी योजनाओं पर विराम लगाना पड़ा है। माना जा रहा है कि आगामी सुनवाई में सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि चिड़ियाघर की जमीन का वाणिज्यिक उपयोग किस तरह से जनहित में होगा और इसका वन्यजीव संरक्षण पर क्या प्रभाव पड़ेगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चिड़ियाघर की जमीन पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक हित से जुड़ी है, ऐसे में इसे किसी निजी या व्यावसायिक परियोजना के लिए इस्तेमाल करने से पहले विस्तृत अध्ययन और अनुमति जरूरी है।
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