पश्चिम बंगाल

Kolkata: राज्यसभा उपचुनाव से पहले बदले समीकरण, सुखेंदु शेखर राय की मौजूदगी पर नजर

Admindelhi1
7 July 2026 1:06 PM IST
Kolkata: राज्यसभा उपचुनाव से पहले बदले समीकरण, सुखेंदु शेखर राय की मौजूदगी पर नजर
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"बंगाल की सियासत में हलचल, सुखेंदु शेखर राय की बैठक में मौजूदगी बनी चर्चा"

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सोमवार रात को कोलकाता के अलीपुर स्थित सरकारी अतिथि भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में पूर्व तृणमूल कांग्रेस सांसद और पूर्व राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय की मौजूदगी ने नई राजनीतिक अटकलों को जन्म दे दिया है।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद अमित शाह ने अलीपुर स्थित सरकारी अतिथि भवन में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य तथा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ संगठनात्मक बैठक की। इसी बैठक में सुखेंदु शेखर राय को भी बुलाया गया। भाजपा की इस महत्वपूर्ण बैठक में उनकी उपस्थिति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई।

सुखेंदु शेखर राय ने हाल ही में राज्यसभा की सदस्यता और तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दिया था, लेकिन अब तक उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता नहीं ली है। ऐसे में अमित शाह की मौजूदगी वाली इस उच्चस्तरीय बैठक में उनका शामिल होना आगामी राजनीतिक रणनीति का संकेत माना जा रहा है।

संयोग से सोमवार को ही निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी की। ये सीटें तृणमूल कांग्रेस के तीन सांसदों के इस्तीफे के कारण रिक्त हुई हैं। इनमें सुखेंदु शेखर राय के अलावा सुष्मिता देव और प्रकाशचिक बराइक शामिल हैं।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, भाजपा अगले एक-दो दिनों में इन तीनों सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है। पार्टी के भीतर ऐसी चर्चा है कि सुखेंदु शेखर राय को राज्यसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

सुखेंदु शेखर राय लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रहे हैं। उन पर कभी भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे और आरजी कर मेडिकल कॉलेज प्रकरण के बाद उन्होंने पार्टी और प्रशासन की कार्यशैली पर सार्वजनिक रूप से सवाल भी उठाए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के कई केंद्रीय नेताओं के साथ उनके पुराने व्यक्तिगत संबंध भी इस बढ़ती नजदीकी का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं।

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