पश्चिम बंगाल

Kolkata: देशव्यापी बंद का दावा, बंगाल रहा बेअसर

Admindelhi1
12 Feb 2026 3:57 PM IST
Kolkata: देशव्यापी बंद का दावा, बंगाल रहा बेअसर
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कोलकाता: चार नई श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग को लेकर 14 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा गुरुवार को बुलाया गया देशव्यापी बंद कई राज्यों में असरदार दिखा, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह बंद लगभग बेअसर साबित हुआ। एक समय वाम दलों का मजबूत गढ़ रहे बंगाल में जनजीवन पूरी तरह सामान्य नजर आया, जिससे बंद की धार पर सवाल खड़े हो गए।

राजधानी कोलकाता समेत राज्य के अधिकांश जिलों में सरकारी और निजी कार्यालय नियमित रूप से खुले रहे। स्कूल और कॉलेजों में भी सामान्य रूप से पढ़ाई हुई। बाजार, परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाएं बिना किसी बाधा के संचालित होती रहीं। बंद के आह्वान के बावजूद आम लोगों ने रोजमर्रा के कामकाज को प्राथमिकता दी, जिससे बंगाल में बंद का असर फीका पड़ गया।

हालांकि, वामपंथी संगठनों ने प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। सीपीआईएम की छात्र शाखा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने जादवपुर यूनिवर्सिटी और प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी के गेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन व्यापक जनसमर्थन का अभाव साफ नजर आया।

ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताएं कामगारों के अधिकारों को कमजोर करती हैं और कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाती हैं। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने दावा किया कि करीब 30 करोड़ कर्मचारी इस बंद के समर्थन में हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की नीतियां कामगार विरोधी, किसान विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक हैं, जिन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

ट्रेड यूनियनों के अनुसार असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, ओडिशा और बिहार में बंद का व्यापक असर देखा गया। विशेषकर केरल में जनजीवन काफी हद तक प्रभावित हुआ, जहां परिवहन और बाजारों पर बंद का असर साफ दिखाई दिया।

बंगाल में बंद के असरहीन रहने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे जनता की बेरुखी बता रहे हैं, जबकि ट्रेड यूनियनें दावा कर रही हैं कि आंदोलन लंबी लड़ाई का हिस्सा है और आने वाले दिनों में इसे और तेज किया जाएगा। फिलहाल, श्रम संहिताओं को लेकर देश की सियासत में टकराव और तीखा हो गया है।

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