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पश्चिम बंगाल: पूर्व बर्धमान जिले के कटवा स्टेशन पर हर दिन एक महिला अपने हाथों से सैकड़ों जरूरतमंदों को भोजन परोसती नजर आती हैं। उनका नाम है काजुली विश्वास, जिन्हें स्थानीय लोग सम्मान से ‘अन्नपूर्णा’ कहते हैं। उनकी कहानी संघर्ष, त्याग और मानवता की एक बड़ी मिसाल बन चुकी है।
काजुली विश्वास एक साधारण गृहिणी थीं, लेकिन उनके भीतर गरीब और बेसहारा लोगों की मदद करने की गहरी इच्छा थी। उन्होंने निर्णय लिया कि वह अपने स्तर पर सड़क और स्टेशन पर रहने वाले भूखे लोगों के लिए खाना बनाएंगी। जब उन्होंने यह बात अपने परिवार और पति को बताई, तो उन्हें समर्थन नहीं मिला। बल्कि उनके सामने एक कठिन विकल्प रख दिया गया कि या तो वे घर-परिवार चुनें या फिर भूखों की सेवा करें।
इस कठिन स्थिति में काजुली ने इंसानियत को चुना और अपना घर छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने अपने कानों की सोने की बालियां बेचकर पहले भोजन सामग्री जुटाई और कटवा स्टेशन के पास जरूरतमंदों के लिए खाना बनाना शुरू किया। शुरुआत में लोग उन्हें अजीब नजरों से देखते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी सेवा ने सबका दिल जीत लिया। आज काजुली विश्वास हर दिन लगभग 100 से अधिक गरीब, बुजुर्ग, बेसहारा और बच्चों को भोजन कराती हैं। उनका भोजन सिर्फ पेट नहीं भरता, बल्कि उसमें मां जैसा स्नेह और अपनापन भी शामिल होता है।
स्टेशन पर रहने वाले लोग और जरूरतमंद उन्हें ‘मां’ कहकर पुकारते हैं। उनकी इस निस्वार्थ सेवा की कहानी जब सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से सामने आई, तो समाज में भी बदलाव देखने को मिला। अब कई लोग आगे आकर उन्हें राशन और आर्थिक सहायता प्रदान कर रहे हैं। काजुली की रसोई अब केवल एक भोजन केंद्र नहीं, बल्कि मानवता और सेवा का प्रतीक बन चुकी है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि असली खुशी और जीवन की सार्थकता धन-दौलत में नहीं, बल्कि किसी भूखे को खाना खिलाने और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने में है।





