पश्चिम बंगाल

जस्टिस रंजना प्रकाश होंगी यूसीसी ड्राफ्ट कमेटी की अध्यक्ष, शुभेंदु का एलान

Saba Naaz
29 Jun 2026 7:50 PM IST
जस्टिस रंजना प्रकाश होंगी यूसीसी ड्राफ्ट कमेटी की अध्यक्ष, शुभेंदु का एलान
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति और देश के प्रशासनिक गलियारों से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में ऐतिहासिक घोषणा करते हुए बताया कि राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC - Uniform Civil Code) को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने सदन को जानकारी दी कि आगामी 2 जुलाई को राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में यूसीसी विधेयक का मसौदा (ड्राफ्ट) आधिकारिक रूप से पेश किया जाएगा। सरकार के इस कदम के बाद राज्य में समान नागरिक कानून को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी अध्यक्षता

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में विधेयक की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए अपनी दूसरी बड़ी घोषणा में बताया कि यूसीसी विधेयक का अंतिम मसौदा तैयार करने वाली उच्च स्तरीय समिति (ड्राफ्ट कमेटी) की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है। जस्टिस देसाई की अध्यक्षता में गठित यह विशेषज्ञ समिति विभिन्न हितधारकों, कानूनी जानकारों और सामाजिक पक्षों से चर्चा कर राज्य के अनुकूल एक निष्पक्ष और मजबूत कानून का खाका तैयार करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इस विधेयक को अंतिम मोहर के लिए राज्य विधानसभा के पटल पर पेश किया जाएगा।

विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने के नियमों में आएगी एकरूपता

प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) बिल का मुख्य उद्देश्य पश्चिम बंगाल में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से ताल्लुक रखते हों, एक समान नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित करना है। वर्तमान में देश और राज्य में अलग-अलग धर्मों के लोग अपने-अपने पर्सनल लॉ (व्यक्तिगत कानूनों) के आधार पर पारिवारिक और सामाजिक फैसले लेते हैं।

नए कानून के लागू होने के बाद मुख्य रूप से चार प्रमुख क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आएगा:

विवाह (Marriage): सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु और पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) के नियम एक जैसे होंगे।

तलाक (Divorce): तलाक के लिए अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रिया और भरण-पोषण (एलुमनी) से जुड़े अधिकार सभी समुदायों की महिलाओं और पुरुषों के लिए समान होंगे।

विरासत और संपत्ति का अधिकार (Inheritance and Property Rights): पैतृक और स्व-अर्जित संपत्ति में बेटे और बेटियों को समान कानूनी अधिकार मिलेगा, जिसमें किसी भी धार्मिक पर्सनल लॉ का हस्तक्षेप नहीं होगा।

गोद लेना (Adoption): बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया को सरल और सर्वव्यापी बनाया जाएगा, जिससे किसी भी पृष्ठभूमि का व्यक्ति कानूनी रूप से बच्चा गोद ले सकेगा।

राज्य की सियासत में गरमाया माहौल

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की इस अचानक और बड़ी घोषणा के बाद विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों के बीच प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। जहां सत्ता पक्ष इसे सामाजिक समानता, महिला सशक्तिकरण और आधुनिक प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बता रहा है, वहीं विपक्षी दलों और कुछ धार्मिक संगठनों ने इस पर अपनी चिंताएं और आपत्तियां जतानी शुरू कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड के बाद पश्चिम बंगाल देश का एक ऐसा प्रमुख राज्य बनने की राह पर है जो यूसीसी को अपने स्तर पर लागू करने के लिए इतनी तेजी से कदम बढ़ा रहा है। अब सभी की निगाहें 2 जुलाई को होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां इस कानून की बारीकियाँ और इसके अंतिम मसौदे का स्वरूप पूरी तरह जनता के सामने आएगा।

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