पश्चिम बंगाल

IIT खड़गपुर के निदेशक को अंतरराष्ट्रीय सम्मान, TWAS फेलो बने

Admindelhi1
7 Nov 2026 2:42 PM IST
IIT खड़गपुर के निदेशक को अंतरराष्ट्रीय सम्मान, TWAS फेलो बने
x
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में प्रो. सुमन चक्रवर्ती को बड़ी जिम्मेदारी

खड़गपुर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्था द वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज (टीडब्ल्यूएएस) का फेलो निर्वाचित किया गया है। उनकी फेलोशिप एक जनवरी 2027 से प्रभावी होगी। वैज्ञानिक अनुसंधान और विशेष रूप से विकासशील देशों में विज्ञान को बढ़ावा देने के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया है।

आईआईटी खड़गपुर की ओर से शुक्रवार शाम को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पांच नवंबर को टीडब्ल्यूएएस की अध्यक्ष प्रो. क्वाराइशा अब्दुल करीम ने आधिकारिक पत्र के माध्यम से प्रो. चक्रवर्ती को उनके निर्वाचन पर बधाई दी। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान और विकासशील देशों में वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत बनाने के प्रयासों की सराहना की।

टीडब्ल्यूएएस एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्था है, जो विकासशील देशों में वैज्ञानिक अनुसंधान और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए काम करती है। इस संस्था का फेलो चुना जाना दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।

प्रो. सुमन चक्रवर्ती वर्तमान में आईआईटी खड़गपुर के निदेशक हैं। इसके साथ ही वे संस्थान के यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग में इंस्टीट्यूट चेयर प्रोफेसर और सर जे.सी. बोस नेशनल फेलो भी हैं। अपने शैक्षणिक और शोध कार्यों के लिए उन्हें पहले भी कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सम्मान तथा फेलोशिप मिल चुकी है। इनमें अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी, रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री, अमेरिकन सोसाइटी ऑफ मैकेनिकल इंजीनियर्स, इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी और इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज जैसी संस्थाएं शामिल हैं।

प्रो. चक्रवर्ती को आगामी टीडब्ल्यूएएस महासम्मेलन में अकादमी के नए सदस्यों के रूप में औपचारिक रूप से परिचित कराया जाएगा। सम्मेलन की तिथि और स्थान की घोषणा संस्था की ओर से बाद में की जाएगी।

आईआईटी खड़गपुर ने इस उपलब्धि को पूरे संस्थान के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि इससे भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। यह उपलब्धि संस्थान के शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी।

Next Story