पश्चिम बंगाल

कोलकाता की सड़कों से हटेंगी घोड़ा-गाड़ियां, सरकार का नया प्लान

nidhi
13 Oct 2026 8:17 AM IST
कोलकाता की सड़कों से हटेंगी घोड़ा-गाड़ियां, सरकार का नया प्लान
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मालिकों ने जताया विरोध
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पर्यटकों को सैर कराने वाली पारंपरिक घोड़ा-गाड़ियों की जगह अब बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक बग्घियां लाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार ने विक्टोरिया मेमोरियल और मैदान इलाके में पर्यटकों के लिए इस्तेमाल होने वाली घोड़ा-गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना बनाई है। शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने इस प्रस्ताव की जानकारी दी है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का प्रमुख उद्देश्य घोड़ों को अनावश्यक श्रम से बचाना और पर्यटकों के लिए आधुनिक परिवहन विकल्प उपलब्ध कराना है।
कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल और मैदान इलाके में घोड़ा-गाड़ियों की सवारी लंबे समय से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही है। शहर घूमने आने वाले पर्यटक इन सजी-धजी बग्घियों में बैठकर आसपास के इलाकों की सैर करते हैं। घोड़ा-गाड़ियों को कोलकाता की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा भी माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों से इन गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले घोड़ों की स्थिति और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पशु कल्याण संगठनों ने घोड़ों से पर्यटकों को ढोने का काम बंद कराने की मांग की है।
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि सरकार कोलकाता में बैटरी से चलने वाली गाड़ियां लाने की तैयारी कर रही है। उनका कहना है कि घोड़ों को जिस तरह दौड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, उससे उन्हें तकलीफ होती है। इसलिए सरकार पर्यटकों की सवारी के लिए घोड़ों के इस्तेमाल को समाप्त करना चाहती है। प्रस्ताव के तहत शुरुआती चरण में पांच बैटरी संचालित बग्घियां शुरू करने की योजना है। इन्हें इस साल सर्दियों के दौरान कोलकाता में उतारने की बात कही गई है। इन गाड़ियों का स्वरूप पारंपरिक बग्घियों जैसा रखा जाएगा, ताकि शहर की ऐतिहासिक पहचान भी बनी रहे।
कोलकाता में वर्तमान में 58 निजी स्वामित्व वाले पंजीकृत घोड़े और 29 लाइसेंस प्राप्त घोड़ा-गाड़ियां हैं। इन्हीं गाड़ियों के माध्यम से विक्टोरिया मेमोरियल और मैदान क्षेत्र में पर्यटकों को सैर कराई जाती है। इस प्रस्ताव को लेकर सरकार ने कोलकाता नगर निगम, कोलकाता पुलिस, पशु अधिकार संगठन पेटा इंडिया, केप फाउंडेशन और घोड़ा-गाड़ी मालिकों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की है।
7 अक्टूबर को हुई बैठक में इलेक्ट्रिक बग्घियों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके माध्यम से नई गाड़ियों की सुरक्षा, संचालन लागत, चार्जिंग व्यवस्था और पर्यटकों के लिए उनकी उपयोगिता का आकलन किया जाएगा।
सरकार की योजना है कि पारंपरिक घोड़ा-गाड़ियों की जगह ऐसी इलेक्ट्रिक बग्घियां चलाई जाएं, जिनका बाहरी स्वरूप पुरानी गाड़ियों जैसा हो। इससे पर्यटक बिना घोड़ों के इस्तेमाल के पारंपरिक बग्घी की सवारी जैसा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। सरकार की इस योजना का घोड़ा-गाड़ी मालिकों ने विरोध किया है। मालिकों का कहना है कि यह व्यवसाय उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। यदि घोड़ा-गाड़ियों को पूरी तरह बंद किया गया, तो इससे उनके रोजगार पर असर पड़ सकता है।
घोड़ा-गाड़ी संचालकों ने स्पष्ट किया है कि वे पारंपरिक बग्घियों को हटाने के प्रयासों का विरोध करेंगे। दूसरी ओर पशु अधिकार संगठनों ने सरकार की योजना का स्वागत किया है। पेटा इंडिया और केप फाउंडेशन लंबे समय से घोड़ा-गाड़ियों की जगह इलेक्ट्रिक बग्घियां चलाने की मांग कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि इस बदलाव से घोड़ों को शारीरिक परेशानी से बचाया जा सकेगा और पर्यटकों के लिए भी सुरक्षित विकल्प उपलब्ध होगा।
पशु कल्याण संगठनों ने वर्ष 2022 में मुंबई से एक बैटरी संचालित बग्घी कोलकाता लाकर उसका प्रदर्शन भी किया था। इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि पारंपरिक घोड़ा-गाड़ियों के स्थान पर इलेक्ट्रिक विकल्प अपनाए जा सकते हैं। सरकार के सामने अब घोड़ा-गाड़ी मालिकों की आजीविका और पशुओं के कल्याण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से यह भी देखा जाएगा कि मौजूदा बग्घी मालिकों और चालकों को नई व्यवस्था में किस प्रकार शामिल किया जा सकता है। फिलहाल कोलकाता में घोड़ा-गाड़ियों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है। सरकार इलेक्ट्रिक बग्घियों की शुरुआत और उनके संचालन की व्यवस्था तैयार कर रही है। पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जा सकता है।
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