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पश्चिम बंगाल
हीरो इंद्रजीत दोनों पैरों के सुन्न होने के बावजूद जिंदगी की जंग लड़ रहा है
Anurag
11 Jun 2025 8:53 PM IST

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Birbhum बीरभूम:बचपन से ही पोलियो के कारण दोनों पैर लकवाग्रस्त थे। फिर भी बीरभूम जिले के लवपुर निवासी इंद्रजीत पाल की कहानी लाचारी की नहीं, बल्कि कठिन समय में संघर्ष कर अपने पैरों पर खड़े होने और सामाजिक दायित्व निभाने की है। जब सुनता कि किसी को खून की जरूरत है तो युवक अपने तीन पहिए वाले स्कूटर से पहुंच जाता। सीमांत कृषक परिवार में जन्मे इंद्रजीत अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। सात माह की उम्र में ही उन्हें पोलियो हो गया।
उनके दोनों पैर सुन्न हो गए। तीन सदस्यीय उनका परिवार दो-चार बीघा जमीन पर किसी तरह गुजारा करता था। इंद्रजीत ने प्रखंड प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई तीन पहिए वाली साइकिल से स्कूल-कॉलेज की सीमा पार की और बीए पास किया। एक निजी संस्था में नौकरी लग गई। वेतन बचाकर उन्होंने तीन पहिए वाला स्कूटर खरीद लिया। लेकिन फिर बुरा वक्त आया। लॉकडाउन के कारण निजी संस्थाओं का काम बंद हो गया उस समय वे काम की तलाश में जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं के दर-दर भटकते रहे। उन्हें कई आश्वासन मिले, लेकिन कोई काम नहीं मिला। एक समय ऐसा आया जब उन्होंने नौकरी की उम्मीद छोड़ दी और गांव के ही सरत मंडल से बैग सिलाई का काम सीखा। इसके बाद इंद्रजीत ने अपने विकलांगता भत्ते से पैसे बचाकर सिलाई मशीन खरीदी और ठेके पर बैग सिलने लगे। अब वे सप्ताह में एक बार तीन पहिया स्कूटर लेकर बोलपुर के तातलपुर कॉलोनी स्थित एक फैक्ट्री जाते हैं। वहां से कच्चा माल लाते हैं, बैग बनाते हैं और वापस पहुंचाते हैं।
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