पश्चिम बंगाल

खाली सीटों की अवैध बिक्री पर HC सख्त, रेलवे को चेतावनी

Kavita2
13 July 2026 12:23 PM IST
खाली सीटों की अवैध बिक्री पर HC सख्त, रेलवे को चेतावनी
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कोलकाता : कलकत्ता हाई कोर्ट ने ट्रेनों में खाली बर्थ को अवैध तरीके से बेचने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए रेलवे प्रशासन को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि कुछ ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर्स (TTEs) कथित तौर पर खाली सीटों को ऐसे बेचते हैं जैसे बाजार में सामान बेचा जा रहा हो। कोर्ट ने देश के सभी रेलवे जोनों के जनरल मैनेजरों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में अधिकतम दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मामला एक पुराने प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें यात्रियों ने आरोप लगाया था कि उन्हें बिना आरक्षित टिकट के ट्रेन में चढ़ने के बाद एक TTE को पैसे देकर बर्थ मिली थी। इसके बाद उनके साथ आपराधिक घटना हुई और उन्हें नशीला पदार्थ देकर लूट लिया गया।

यह घटना फरवरी 2009 की है, जब दो यात्री न्यू जलपाईगुड़ी से सियालदह जाने वाली तीस्ता तोरसा एक्सप्रेस में अनरिजर्व्ड टिकट लेकर सवार हुए थे। आरोप के मुताबिक, ट्रेन में उन्हें एक TTE मिला, जिसने पैसे लेकर उन्हें खाली बर्थ उपलब्ध कराई। यात्रियों ने उस समय व्यवस्था के अनुसार सीट हासिल कर ली, लेकिन बाद में उनके साथ बड़ी वारदात हो गई।

बताया गया कि यात्रा के दौरान दो अपराधियों ने दोनों यात्रियों को नशीला पदार्थ खिला दिया और उनके कीमती सामान लेकर फरार हो गए। इस घटना के बाद रेलवे व्यवस्था में भ्रष्टाचार और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे।

मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिया कि टिकट जांच व्यवस्था को मजबूत किया जाए और ऐसे कर्मचारियों पर नजर रखी जाए जो नियमों का उल्लंघन कर यात्रियों से अवैध पैसे लेते हैं।

अदालत ने कहा कि रेलवे में TTE की भूमिका यात्रियों को सुविधा और सुरक्षा प्रदान करने की होती है। यदि कोई कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग कर खाली सीटों का सौदा करता है तो यह न केवल रेलवे की छवि को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करता है।

हाई कोर्ट ने रेलवे के सभी जोनों के महाप्रबंधकों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे मामलों की निगरानी करें और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। कोर्ट ने अधिकतम संभव दंड देने की बात कही, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

रेलवे में आरक्षित सीटों को लेकर यात्रियों की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। कई बार यात्रियों ने आरोप लगाया है कि कुछ कर्मचारी नियमों को दरकिनार कर सीट उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे लेते हैं। हालांकि रेलवे प्रशासन भी समय-समय पर ऐसे मामलों में कार्रवाई करता रहा है।

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि रेलवे को अपनी निगरानी व्यवस्था और पारदर्शी बनानी होगी। खाली बर्थ के आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार होनी चाहिए, ताकि किसी यात्री के साथ भेदभाव या अवैध वसूली न हो।

रेलवे अधिकारियों के लिए यह आदेश एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी रेलवे जोनों को अपने स्तर पर जांच और निगरानी की व्यवस्था मजबूत करनी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे जैसी बड़ी परिवहन व्यवस्था में यात्रियों का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि टिकट जांच से जुड़े कर्मचारी ही नियम तोड़ते हैं तो इससे पूरी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश के बाद उम्मीद है कि रेलवे खाली बर्थ आवंटन की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए कदम उठाएगा। साथ ही ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई तेज होगी जो यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर अवैध कमाई करने की कोशिश करते हैं।

यह मामला एक दशक से अधिक पुराना होने के बावजूद रेलवे व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता के मुद्दे को फिर से सामने ले आया है। कोर्ट का यह निर्देश यात्रियों के हितों की सुरक्षा और रेलवे में भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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