पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक में हाकिम का बयान

SHIDDHANT
28 Oct 2025 9:44 PM IST
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक में हाकिम का बयान
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Kolkata कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा मंगलवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक दलों ने मतदाता सूची की शुद्धता पर अपनी राय रखी। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से शहरी विकास मंत्री फिरहाद हाकिम (Firhad Hakim) ने हिस्सा लिया। उन्होंने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर आयोग की "स्पेशल समरी रिविजन (SIR)" प्रक्रिया के दौरान एक भी वास्तविक मतदाता का नाम हटाया गया तो टीएमसी सख्त विरोध करेगी। फिरहाद हाकिम ने कहा, “हमने चुनाव आयोग से साफ कहा है कि मतदाता सूची में किसी भी असली वोटर का नाम गलत तरीके से न हटाया जाए। अगर ऐसा हुआ, तो हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरेंगे। हमारे राज्य के लोग वोट देने का अधिकार खोएंगे तो यह गंभीर बात होगी।
बैठक में बीजेपी, कांग्रेस, वामदल और अन्य राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। सभी दलों को चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के सत्यापन और संशोधन प्रक्रिया पर सुझाव देने के लिए बुलाया था। आयोग का कहना है कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत 1 जनवरी 2026 को संदर्भ तिथि मानकर मतदाता सूची अपडेट की जा रही है, ताकि आने वाले चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी न रहे। टीएमसी प्रतिनिधि हाकिम ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल मतदाता सूची में नाम हटवाने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “कुछ दल चाहते हैं कि अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग के मतदाताओं के नाम हटाए जाएं। लेकिन हम यह नहीं होने देंगे। हमने आयोग को सबूतों के साथ अपनी आपत्तियां दी हैं और निष्पक्षता की मांग की है।”
उधर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जवाब में कहा कि टीएमसी बोगस वोटर्स (फर्जी मतदाताओं) की रक्षा कर रही है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि सत्ताधारी दल राज्य में “वोट बैंक” बनाए रखने के लिए फर्जी पहचान वाले लोगों को मतदाता सूची में शामिल रखता है। चुनाव आयोग ने सभी दलों से अपील की है कि वे अपने स्तर पर सत्यापन कार्य में सहयोग करें ताकि अंतिम मतदाता सूची पारदर्शी और त्रुटिरहित हो। अधिकारियों के अनुसार, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 27 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी और आपत्तियां या सुधार 9 दिसंबर तक स्वीकार किए जाएंगे।
इस बीच, राजनीतिक माहौल में मतदाता सूची को लेकर तनातनी बढ़ गई है। टीएमसी और बीजेपी दोनों एक-दूसरे पर मतदाता हेरफेर का आरोप लगा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले महीनों में और तीखा हो सकता है, क्योंकि बंगाल में चुनावी साल से पहले मतदाता सूची को लेकर हर पार्टी की रणनीति तय होती दिखाई दे रही है।
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