पश्चिम बंगाल

बंगाल में UCC पर सरकार का रुख स्पष्ट, कानूनी प्रक्रिया पर जोर

Kavita2
26 Jun 2026 3:56 PM IST
बंगाल में UCC पर सरकार का रुख स्पष्ट, कानूनी प्रक्रिया पर जोर
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West Bengal पश्चिम बंगाल: कोलकाता में शुक्रवार को आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए यूसीसी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री ने यह बयान राष्ट्र गीत के रचयिता और साहित्य सम्राट बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 189वीं जयंती के अवसर पर कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू करने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है और सरकार उसी ढांचे के अनुसार कदम उठाएगी।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार अन्य राज्यों की प्रक्रियाओं का अध्ययन करेगी और गुजरात तथा असम जैसे भाजपा शासित राज्यों में अपनाए जा रहे मॉडल से सीख लेगी। उनके अनुसार, किसी भी बड़े कानून को लागू करने से पहले उसके कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का पूरा मूल्यांकन आवश्यक होता है।

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यूसीसी का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और कानूनी ढांचे से जुड़ा हुआ विषय है, जिसे पूरी गंभीरता और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार इस विषय पर जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएगी, बल्कि सभी हितधारकों और कानूनी विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे महान साहित्यकारों की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम समाज को उनकी विचारधारा और योगदान से जोड़ने का काम करते हैं।

यूसीसी को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच पश्चिम बंगाल में इस मुद्दे पर सरकार के रुख को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल इस विषय पर अलग-अलग मत रख रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि वह केवल संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही कोई निर्णय लेगी।

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार इस विषय पर अन्य राज्यों में लागू किए गए कानूनों और उनके प्रभावों का अध्ययन कर सकती है। खासकर गुजरात और असम में यूसीसी से जुड़े कदमों और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूसीसी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी राज्य सरकार के लिए संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख अपनाना जरूरी होता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर सामाजिक संरचना और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा मामला है।

इस बीच, मुख्यमंत्री के बयान के बाद राज्य में राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देने की तैयारी शुरू कर दी है, जबकि सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्णय लेना है।

फिलहाल राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यूसीसी पर कोई भी कदम केवल संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही उठाया जाएगा। सरकार का कहना है कि वह इस विषय पर जल्दबाजी नहीं करेगी और सभी पहलुओं पर विस्तृत अध्ययन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इस प्रकार पश्चिम बंगाल में यूसीसी को लेकर सरकार का रुख धीरे-धीरे स्पष्ट हो रहा है, जिसमें कानूनी प्रक्रिया, अन्य राज्यों के अनुभव और संवैधानिक ढांचे को आधार बनाया जा रहा है।

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