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तिलक लगाने पर छात्रा को स्कूल से किया बाहर, हंगामे के बाद वापसी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में एक छात्रा के माथे पर तिलक लगाने और गले में तुलसी की माला पहनकर स्कूल आने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मामला बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप से स्कूल प्रबंधन ने अपना फैसला बदलते हुए छात्रा का दोबारा नामांकन कर लिया। छात्रा को पहले स्कूल से बाहर कर दिया गया था, लेकिन विवाद और विरोध के बाद उसे फिर से पढ़ाई जारी रखने का मौका दिया गया।
यह मामला पुरुलिया जिले के पाड़ा क्षेत्र स्थित पाड़ा गर्ल्स हाई स्कूल (उच्च माध्यमिक) का है। जानकारी के अनुसार, स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा सुमना माझी पिछले करीब एक वर्ष से माथे पर तिलक और गले में तुलसी की माला पहनकर स्कूल आ रही थी। बताया जा रहा है कि छात्रा ने गुरु से दीक्षा लेने के बाद यह धार्मिक पहचान अपनाई थी।
हाल ही में स्कूल की प्रार्थना सभा के दौरान छात्रा के माथे पर लगे तिलक को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि सभी छात्राओं और शिक्षिकाओं के सामने उसका तिलक मिटा दिया गया और उसे भविष्य में तिलक लगाकर तथा तुलसी की माला पहनकर स्कूल नहीं आने की हिदायत दी गई।
इसके बाद मामला छात्रा और उसके परिवार के लिए परेशानी का कारण बन गया। स्कूल प्रबंधन की कार्रवाई के बाद विवाद बढ़ गया और इसकी जानकारी शिक्षा विभाग तक पहुंची। मामले में हस्तक्षेप करते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
विवाद के बाद स्कूल प्रबंधन ने छात्रा को जारी किया गया ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) वापस ले लिया और उसका दोबारा नामांकन कर दिया। अब छात्रा फिर से स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगी।
घटना के बाद इलाके में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई। कुछ लोगों ने स्कूल की कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने स्कूल में अनुशासन और नियमों के पालन को लेकर अपनी राय रखी।
मामले को लेकर स्कूल प्रबंधन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल विवाद शांत हो गया है और छात्रा की पढ़ाई दोबारा शुरू हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में विद्यार्थियों के अधिकार, अनुशासन और व्यक्तिगत आस्था के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। ऐसे मामलों में संवेदनशील तरीके से समाधान निकालना चाहिए, ताकि छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो।
सुमना माझी के दोबारा नामांकन के बाद उसके परिवार ने राहत की सांस ली है। परिवार की प्राथमिकता अब छात्रा की पढ़ाई को आगे बढ़ाना है। वहीं, शिक्षा विभाग भी ऐसे मामलों में स्कूलों को उचित दिशा-निर्देश देने पर जोर दे रहा है।
फिलहाल पुरुलिया का यह मामला शिक्षा संस्थानों में धार्मिक प्रतीकों और विद्यार्थियों की स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। छात्रा के दोबारा दाखिले के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।





