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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल सुवेंदु अधिकारी के जीवन और राजनीतिक सफर को इस बार कोलकाता की एक दुर्गा पूजा में विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजकों ने बुधवार को बताया कि हिंदू महासभा की ओर से आयोजित इस पूजा में अधिकारी के बचपन से लेकर उनके राजनीतिक संघर्ष और मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने की यात्रा को पंडाल की थीम के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। पूजा की थीम 'नंदीग्राम से नबान्न: बुबाईर जययात्रा' रखी गई है।
आयोजकों के मुताबिक, पूजा पंडाल को महज धार्मिक आयोजन के स्थान के तौर पर नहीं, बल्कि एक तरह की दृश्यात्मक कहानी के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसमें मॉडल, फ्लेक्स पैनल, तस्वीरों, भित्तिचित्रों और डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से अधिकारी के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन के अलग-अलग चरणों को सामने लाया जाएगा। 'बुबाई' सुवेंदु अधिकारी का लोकप्रिय नाम है और इसी नाम को पूजा की थीम में शामिल किया गया है।
हिंदू महासभा के राज्य अध्यक्ष चंद्रचूड़ गोस्वामी ने बताया कि पंडाल में अधिकारी के जीवन से जुड़े विभिन्न पड़ावों को क्रमवार तरीके से दिखाने की योजना है। इसमें उनके बचपन, राजनीति में प्रवेश, विभिन्न राजनीतिक आंदोलनों में उनकी भूमिका और संघर्ष तथा आगे चलकर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में उनके उभरने तक की कहानी को शामिल किया जाएगा।
गोस्वामी के अनुसार, पंडाल में अधिकारी की एक छोटी तस्वीर भी लगाई जाएगी। इसके अलावा एक डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की जाएगी, जिसमें उनके राजनीतिक संघर्ष और सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को दर्शाया जाएगा। आयोजकों का दावा है कि पूरे इंस्टॉलेशन को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि आगंतुक अधिकारी की राजनीतिक यात्रा को एक दृश्य कथा के रूप में समझ सकें।
पंडाल की प्रस्तुति में ऐतिहासिक संदर्भों के साथ कलात्मक तत्वों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि अलग-अलग घटनाओं और राजनीतिक पड़ावों को मॉडल और भित्तिचित्रों के जरिए दर्शाने की कोशिश होगी। इसके साथ ही फ्लेक्स पैनल और तस्वीरों के माध्यम से उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों को भी पंडाल की कहानी का हिस्सा बनाया जाएगा।
'नंदीग्राम से नबान्न' शीर्षक सुवेंदु अधिकारी के राजनीतिक जीवन के दो महत्वपूर्ण पड़ावों की ओर संकेत करता है। नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र रहा है और अधिकारी की राजनीतिक पहचान के निर्माण में भी इसका अहम स्थान रहा है। वहीं 'नबान्न' राज्य सरकार के प्रशासनिक मुख्यालय का प्रतीक है। इस तरह पूजा की थीम को अधिकारी के राजनीतिक संघर्ष से सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की यात्रा के रूप में पेश किया जा रहा है।
दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल में धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। कोलकाता और आसपास के इलाकों में हर वर्ष विभिन्न पूजा समितियां अपने पंडालों की अनूठी थीम के लिए जानी जाती हैं। सामाजिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और समसामयिक विषयों को पंडालों की सजावट और प्रस्तुतियों में जगह मिलती रही है। ऐसे में किसी प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति के जीवन को पूजा की थीम बनाना भी आयोजन को राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला सकता है।
सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है। नंदीग्राम आंदोलन और उसके बाद राज्य की राजनीति में हुए बदलावों के दौरान उनकी भूमिका ने उन्हें व्यापक राजनीतिक पहचान दिलाई। बाद के वर्षों में उनके राजनीतिक रुख में बदलाव आया और वे भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में भी वे सरकार के खिलाफ मुखर राजनीतिक भूमिका निभाते रहे हैं।
हिंदू महासभा द्वारा आयोजित इस पूजा में उनके जीवन के इन्हीं राजनीतिक पहलुओं को अलग-अलग माध्यमों से प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि आयोजकों की ओर से इसे एक कलात्मक और ऐतिहासिक प्रस्तुति के रूप में बताया गया है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल में इस तरह की थीम का राजनीतिक संदेश भी चर्चा का विषय बन सकता है।
पंडाल में दिखाई जाने वाली डॉक्यूमेंट्री को भी इस प्रस्तुति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इसमें अधिकारी के राजनीतिक संघर्षों, आंदोलनों और उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों को दृश्य माध्यम के जरिए सामने लाने की योजना है। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य दर्शकों को उनके सार्वजनिक जीवन की पूरी यात्रा से परिचित कराना है।
इस तरह 'नंदीग्राम से नबान्न: बुबाईर जययात्रा' इस वर्ष कोलकाता की दुर्गा पूजा में एक अलग तरह की थीम के रूप में सामने आने की तैयारी में है। धार्मिक उत्सव के बीच राजनीतिक जीवन की इस दृश्य प्रस्तुति पर लोगों और राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी। पंडाल में इतिहास, राजनीति और कला के मेल के जरिए सुवेंदु अधिकारी की यात्रा को किस तरह प्रस्तुत किया जाता है, यह पूजा के दौरान आकर्षण का प्रमुख केंद्र हो सकता है।





