- Home
- /
- राज्य
- /
- पश्चिम बंगाल
- /
- अज़ान के लाउडस्पीकर पर...
पश्चिम बंगाल
अज़ान के लाउडस्पीकर पर नया बवाल, बंगाल में पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
Ratna Netam
6 Aug 2026 9:10 PM IST

x
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से कई मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस मस्जिदों में अज़ान के लिए इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर हटाने का मौखिक दबाव बना रही है। इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है और धार्मिक स्वतंत्रता, शोर प्रदूषण नियंत्रण तथा प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से अब तक ऐसा कोई लिखित आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन कई मस्जिद प्रबंधन समितियों का कहना है कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने उन्हें लाउडस्पीकर हटाने या उसकी जगह कम ध्वनि वाले उपकरण लगाने के निर्देश दिए हैं।
बताया जा रहा है कि यह विवाद उस फैसले के बाद सामने आया, जिसमें राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में सभी धार्मिक स्थलों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित शोर प्रदूषण संबंधी नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया था। इन नियमों के अनुसार दिन के समय ध्वनि स्तर 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए। सरकार ने पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है कि सभी धार्मिक संस्थान निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करें।
इसी कार्रवाई के दौरान कई मस्जिदों की प्रबंधन समितियों का दावा है कि पुलिस ने उन्हें मौखिक रूप से लाउडस्पीकर हटाने या उसकी जगह कम ध्वनि वाले साउंड बॉक्स लगाने के लिए कहा है। कुछ इमामों का कहना है कि उन्हें स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि ध्वनि सीमा का पालन नहीं किया गया तो प्रशासन कार्रवाई करेगा। दूसरी ओर, कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ध्वनि सीमा के उल्लंघन के कारण 1,200 से अधिक मस्जिदों और लगभग 200 मंदिरों को भी लाउडस्पीकर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं। पार्टी के एक गुट ने संकेत दिया है कि वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा करेगा और मस्जिदों पर कथित दबाव का मुद्दा उठाएगा। वहीं दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के तीन बागी सांसद—पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, खलीलुर रहमान और अबू ताहिर खान—ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करने और शोर प्रदूषण संबंधी नियमों को लागू करते समय धार्मिक भावनाओं का सम्मान बनाए रखने की मांग की गई है।
बागी नेताओं का कहना है कि कानून का पालन सभी धार्मिक स्थलों पर समान रूप से होना चाहिए, लेकिन किसी भी समुदाय की धार्मिक परंपराओं को प्रभावित किए बिना संतुलित समाधान निकाला जाना आवश्यक है। उनका तर्क है कि प्रशासनिक कार्रवाई पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए ताकि किसी समुदाय में भेदभाव की भावना पैदा न हो।
इस मुद्दे पर मुस्लिम संगठनों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पूर्व मंत्री और जमीयत उलेमा-ए-हिंद की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने आरोप लगाया कि पुलिस विभिन्न मस्जिदों में जाकर प्रबंधन समितियों पर लाउडस्पीकर हटाने का दबाव बना रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की और इस मुद्दे का समाधान नहीं निकाला, तो राज्यभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि प्रशासन अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करता है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। उनका कहना है कि यदि कोई लिखित निर्देश नहीं है, तो स्थानीय स्तर पर की जा रही कार्रवाई का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए।
विवाद के बीच कई सामाजिक संगठनों ने भी संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि शोर प्रदूषण नियंत्रण पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, लेकिन इसे लागू करते समय सभी धार्मिक समुदायों के संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता का भी सम्मान किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन पारदर्शिता के साथ स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे और सभी धार्मिक संस्थानों पर समान रूप से नियम लागू करे, तो इस विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सकता है।
फिलहाल पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज है और सभी की नजरें राज्य सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। सरकार की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह कार्रवाई केवल शोर प्रदूषण नियमों के पालन तक सीमित है या इसे लेकर उठ रहे आरोपों में कितना तथ्य है।
TagsAzaanloudspeakerriotBengalpoliceactionquestionअज़ानलाउडस्पीकरबवालबंगालपुलिसकार्रवाईसवालजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





