पश्चिम बंगाल

अनंत महाराज पर FIR दर्ज बंगा विभूषण सम्मान वापस लेने का फैसला

Ratna Netam
14 Aug 2026 6:27 PM IST
अनंत महाराज पर FIR दर्ज बंगा विभूषण सम्मान वापस लेने का फैसला
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कोलकाता। नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में भाजपा के राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले की पुलिस ने शुक्रवार को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। इससे एक दिन पहले राज्य सरकार ने उन्हें दिया गया ‘बंग विभूषण’ सम्मान वापस लेने की घोषणा की थी।
कूचबिहार जिले के पुलिस अधीक्षक मनीष जोशी ने बताया कि सात अगस्त को कूचबिहार नगरपालिका के वार्ड नंबर 10 निवासी एक व्यक्ति ने अनंत महाराज के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत में सांसद पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था। शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस ने फिलहाल एफआईआर में लगाई गई धाराओं और आगे की कार्रवाई का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। मामले से जुड़े बयान, सोशल मीडिया पोस्ट और उपलब्ध वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच किए जाने की संभावना है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अनंत महाराज ने हाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका और आजाद हिंद फौज के गठन को लेकर कई टिप्पणियां की थीं। आरोप है कि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी के योगदान पर सवाल उठाने के साथ कहा था कि नेताजी ने जर्मनी द्वारा बंदी बनाए गए भारतीय सैनिकों का इस्तेमाल किया। उनकी इन टिप्पणियों के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कड़ा विरोध शुरू हो गया था।
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि नेताजी के बारे में अपमानजनक या अस्वीकार्य टिप्पणी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पुलिस को ऐसे मामलों में राजनीतिक पद और संबद्धता की परवाह किए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि कानून सांसदों, विधायकों और सरकारी अधिकारियों समेत सभी पर समान रूप से लागू होगा।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद राज्य सरकार ने गुरुवार को अनंत महाराज को दिया गया ‘बंग विभूषण’ सम्मान वापस लेने और इसे आधिकारिक रिकॉर्ड से रद्द करने का फैसला किया। यह पश्चिम बंगाल सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है। अनंत महाराज को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में 21 फरवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में यह सम्मान दिया गया था।
राज्य के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने आदेश जारी करते हुए कहा कि नेताजी के संबंध में सांसद की टिप्पणियां इस प्रतिष्ठित सम्मान की गरिमा के अनुरूप नहीं थीं। इसके बाद सरकारी रिकॉर्ड से उनके नाम के साथ जुड़ा ‘बंग विभूषण’ सम्मान हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
सम्मान वापस लिए जाने की घोषणा के बाद अनंत महाराज ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर वीडियो संदेश जारी कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यदि अनजाने में कही गई उनकी किसी बात से किसी व्यक्ति को मानसिक ठेस पहुंची है तो वह इसके लिए हृदय से क्षमा मांगते हैं। उन्होंने नेताजी के प्रति पूरा सम्मान व्यक्त करने की बात भी कही।
हालांकि, सांसद की ओर से जारी माफीनामे के बाद भी पुलिस की कानूनी कार्रवाई नहीं रुकी। शिकायत पहले ही सात अगस्त को दर्ज कराई जा चुकी थी और उसकी जांच के आधार पर शुक्रवार को एफआईआर दर्ज कर ली गई। पुलिस अब यह देखेगी कि सांसद का बयान किन परिस्थितियों में दिया गया, उसका पूरा संदर्भ क्या था और क्या उससे संबंधित कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।
अनंत महाराज उत्तर बंगाल के प्रमुख राजबंशी नेता माने जाते हैं और ग्रेटर कूचबिहार आंदोलन से भी जुड़े रहे हैं। भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। उनके बयान के कारण भाजपा को भी राजनीतिक असहजता का सामना करना पड़ा है, क्योंकि राज्य की भाजपा सरकार ने अपने ही सांसद के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुरस्कार वापस ले लिया है।
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