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रोजगार देने को लेकर लाख दावे किए जाएं, लेकिन आंकड़े कुछ और हकीकत बयां कर रहे हैं
जनता से रिश्ता वेबडेस्क : सरकारी स्तर पर भले ही युवाओं को रोजगार देने को लेकर लाख दावे किए जाएं, लेकिन आंकड़े कुछ और हकीकत बयां कर रहे हैं। प्रदेश में आठ लाख से अधिक बेरोजगारों की तुलना में बीते पांच वर्षों में एक प्रतिशत युवाओं को भी रोजगार नहीं मिल पाया।यही नहीं, इन पांच वर्षों में छह गुना रोजगार मेले भी कम हो गए हैं। जिनमें चयनित युवाओं की संख्या 7489 से कम होकर 411 पहुंच गई है।चुनाव से पहले युवाओं को रिझाने के लिए खूब घोषणाएं की जाती हैं। भर्ती निकाली जाती हैं, लेकिन लेटलतीफी, धांधली, कोर्ट में मामला जाने से भर्तियां कभी भी समय से पूरा नहीं हो पाती है। दूसरी ओर सेवायोजन विभाग के माध्यम से लगाए जाने वाले रोजगार मेलों का हाल तो इससे भी चिंताजनक है। पांच साल पहले जहां पंजीकृत युवाओं में से 0.84 को रोजगार मिलता था।
वहीं, यह आंकड़ा पिछले वर्ष सिर्फ 0.04 रह गया। सेवायोजन की ओर से कराई जाने वाली भर्तियों को लेकर सरकार अपनी पीठ थपथपाती है। पर शायद ही वर्षभर के आंकड़ों को लेकर समीक्षा होती हो। हालांकि यह आंकड़ा सिर्फ पंजीकृत बेरोजगारों का है। यदि उन युवाओं की बात करें जो पंजीकृत नहीं है तो आंकड़ा प्रदेश में इससे भी अधिक होगा।
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