- Home
- /
- राज्य
- /
- पश्चिम बंगाल
- /
- ED की पश्चिम बंगाल में...
ED की पश्चिम बंगाल में बड़ी छापेमारी, पूर्व DCP और ‘सोना पप्पू’ से जुड़े ठिकानों पर तलाशी

West Bengal वेस्ट बंगाल: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर नए सिरे से छापेमारी की। यह कार्रवाई कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास और कथित अपराधी बिस्वजीत पोद्दार से जुड़े मामलों की जांच के तहत की गई है।
अधिकारियों के अनुसार, दोनों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वे वर्तमान में ED की हिरासत में हैं। जांच एजेंसी ने यह छापेमारी उनसे पूछताछ के दौरान सामने आए नए तथ्यों के आधार पर की है।
सूत्रों के मुताबिक, कोलकाता के कस्बा, चक्रबेरिया और रॉयड स्ट्रीट इलाके सहित कुल नौ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। इसके अलावा मुर्शिदाबाद जिले के कंडी में बिस्वास के पैतृक घर पर भी छापेमारी की गई।
जांच के दायरे में कई अन्य लोगों के ठिकाने भी शामिल हैं। इनमें मोहम्मद अली उर्फ मैक्स राजू, बिस्वास के भतीजे सौरव अधिकारी और कोलकाता पुलिस में तैनात सब-इंस्पेक्टर रुहिल अमीन अली के आवास शामिल हैं। इन सभी से कथित रूप से इस नेटवर्क से जुड़े वित्तीय और जमीन लेन-देन के संबंधों की जांच की जा रही है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छापेमारी के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि अवैध संपत्ति और धन के लेन-देन से जुड़े सुराग मिल सकें।
अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोगों पर जबरन जमीन की खरीद-फरोख्त और अवैध धन के संचालन में सहायता करने का आरोप है। इसी संदर्भ में दक्षिण कोलकाता के चक्रबेरिया इलाके में एक व्यवसायी के घर की भी तलाशी ली गई, जो बिस्वजीत पोद्दार का करीबी बताया जाता है।
ED का कहना है कि यह पूरा मामला संगठित वित्तीय अनियमितताओं और अवैध संपत्ति लेन-देन से जुड़ा हुआ है, जिसमें कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे और भी छापेमारी की जा सकती है। फिलहाल पूरे मामले में जांच जारी है और कई अहम दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है, जबकि एजेंसियां मामले की तह तक पहुंचने के लिए लगातार जांच को आगे बढ़ा रही हैं।





