पश्चिम बंगाल

कोलकाता चिड़ियाघर में मांसाहारी जानवरों का बदला आहार

Kavita2
3 Aug 2026 3:05 PM IST
कोलकाता चिड़ियाघर में मांसाहारी जानवरों का बदला आहार
x

कोलकाता : सरकारी अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन में मांसाहारी जानवरों के भोजन की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। चिड़ियाघर में अब कई मांसाहारी जानवरों को भैंस के मांस की जगह बकरी का मांस खिलाया जा रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण शहर के म्युनिसिपल बूचड़खाने में भैंसों और अन्य मवेशियों की कटाई पर लगी रोक बताई जा रही है। इस बदलाव के चलते चिड़ियाघर प्रशासन का भोजन पर होने वाला खर्च भी काफी बढ़ गया है।

जानकारी के अनुसार, कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (KMC) के टांगरा स्थित बूचड़खाने में मई से भैंस और अन्य मवेशियों के वध पर रोक लगी हुई है। इसके बाद चिड़ियाघर को मांस की आपूर्ति करने वाले विक्रेताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आपूर्तिकर्ताओं का कहना है कि नगर निकाय की ओर से उनके लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया गया है, जिसके कारण भैंस के मांस की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन में पहले कई मांसाहारी जानवरों को नियमित रूप से भैंस का मांस दिया जाता था। इनमें आठ बाघ, ग्रे भेड़ियों का एक जोड़ा और एशियाई शेरों का एक जोड़ा शामिल हैं। इन जानवरों के आहार में बदलाव करना चिड़ियाघर प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि मांसाहारी जानवरों के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन की लगातार उपलब्धता जरूरी होती है।

चिड़ियाघर से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, जानवरों के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए भोजन की व्यवस्था की जाती है। अचानक किसी एक प्रकार के मांस की उपलब्धता प्रभावित होने पर वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है। इसी कारण अब बकरी के मांस की आपूर्ति बढ़ाई गई है ताकि जानवरों की भोजन संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

हालांकि, बकरी का मांस भैंस के मांस की तुलना में काफी महंगा है। इसके कारण चिड़ियाघर के भोजन बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि सीमित संसाधनों में जानवरों के लिए गुणवत्तापूर्ण और पर्याप्त भोजन की व्यवस्था बनाए रखी जाए।

मांस आपूर्तिकर्ताओं का कहना है कि लाइसेंस से जुड़ी समस्याओं के कारण नियमित आपूर्ति प्रभावित हुई है। उनका दावा है कि पहले बूचड़खाने के माध्यम से भैंस के मांस की आपूर्ति अपेक्षाकृत आसान थी, लेकिन अब वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। इससे लागत बढ़ गई है और आपूर्ति प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।

चिड़ियाघर प्रशासन की प्राथमिकता जानवरों की सेहत और उनकी जरूरतों को पूरा करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाघ, शेर और भेड़ियों जैसे मांसाहारी जीवों के लिए आहार में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व होना आवश्यक है। इसलिए भोजन बदलते समय मात्रा और गुणवत्ता दोनों का ध्यान रखना पड़ता है।

अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन कोलकाता का एक प्रमुख पर्यटक स्थल है और यहां बड़ी संख्या में लोग वन्यजीवों को देखने आते हैं। चिड़ियाघर में रखे गए जानवरों की देखभाल के लिए भोजन, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं लगातार बनाए रखनी होती हैं।

भोजन व्यवस्था में आए इस बदलाव के बीच चिड़ियाघर प्रशासन और आपूर्तिकर्ता दोनों ही स्थायी समाधान की तलाश में हैं। यदि भैंस के मांस की आपूर्ति से जुड़ी समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो चिड़ियाघर को अपने बजट और भोजन प्रबंधन की रणनीति में और बदलाव करने पड़ सकते हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि चिड़ियाघरों में रहने वाले मांसाहारी जानवरों का आहार प्राकृतिक परिस्थितियों की जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए। किसी भी बदलाव को वैज्ञानिक आधार और पशु चिकित्सकों की सलाह के अनुसार लागू किया जाना चाहिए, ताकि जानवरों के स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

फिलहाल अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन में मांसाहारी जानवरों के लिए बकरी के मांस की व्यवस्था जारी है। चिड़ियाघर प्रशासन स्थिति पर नजर रख रहा है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि भोजन की गुणवत्ता और मात्रा में किसी तरह की कमी न आए।

Next Story