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पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर विधानसभा : इतिहास, भूगोल और राजनीति का दिलचस्प संगम
SHIDDHANT
14 March 2026 8:24 PM IST

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Kolkata कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में डायमंड हार्बर विधानसभा एक ऐसी सीट है, जहां इतिहास, भूगोल और राजनीति का दिलचस्प संगम देखने को मिलता है। दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित यह सीट डायमंड हार्बर लोकसभा के अंतर्गत आने वाले सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है और राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में शामिल है। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह सीट एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है, क्योंकि यहां पिछले एक दशक से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का दबदबा बना है, जबकि भाजपा इसे चुनौती देने की कोशिश में है।
डायमंड हार्बर सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से भी अहम है। हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर बसा यह इलाका वहीं स्थित है जहां नदी आगे चलकर बंगाल की खाड़ी से मिलती है। यही कारण है कि अंग्रेजी शासन के दौरान इसे एक महत्वपूर्ण बंदरगाह के रूप में इस्तेमाल किया गया। इस क्षेत्र का पुराना नाम हाजीपुर बताया जाता है, जिसे अंग्रेजों ने बदलकर डायमंड हार्बर कर दिया था। पुरातात्विक खोजों के मुताबिक यहां मानव बसावट के संकेत करीब दो हजार साल पुराने माने जाते हैं। कभी यह इलाका पुर्तगाली समुद्री डाकुओं का अड्डा भी माना जाता था। आज भी नदी किनारे एक पुराने किले का खंडहर और एक पुराना लाइटहाउस इतिहास की गवाही देते हैं।
डायमंड हार्बर दक्षिणी गंगा बेसिन के निचले समुद्री डेल्टा क्षेत्र में स्थित है। यहां हुगली नदी में नियमित ज्वार-भाटा आता है, इसलिए कई जगह तटबंध बनाए गए हैं। उपजाऊ मिट्टी के कारण यहां धान की खेती प्रमुख है, जबकि नदी और ज्वारीय जलमार्गों में मछली पकड़ना भी बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का साधन है। नदी मार्ग के जरिए यह इलाका गंगा सागर और रायचक जैसे क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है, जबकि सड़क और रेल मार्ग से कोलकाता लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर है।
डायमंड हार्बर विधानसभा सीट का गठन 1951 में हुआ था। इस सीट में डायमंड हार्बर म्युनिसिपैलिटी, डायमंड हार्बर-1 ब्लॉक की सात ग्राम पंचायतें, डायमंड हार्बर-2 कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक की छह ग्राम पंचायतें शामिल हैं। यह सीट ग्रामीण इलाकों से ज्यादा प्रभावित है। यहां केवल करीब 21 प्रतिशत मतदाता शहरी क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि बड़ी आबादी गांवों में बसती है। इस सीट ने 1952 से लेकर अब तक सभी विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है और इसके चुनावी इतिहास में कई राजनीतिक दलों का दबदबा अलग-अलग समय में रहा है।
शुरुआती दौर में यहां प्रजा सोशलिस्ट पार्टी का प्रभाव था। 1952 के पहले चुनाव सहित शुरुआती दो चुनाव इसी दल ने जीते। इसके बाद इंडियन नेशनल कांग्रेस ने भी जीत दर्ज की और कई बार विपक्ष के लगातार जीत के सिलसिले को तोड़ा। 1970 के दशक के बाद इस सीट पर लंबे समय तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का प्रभाव रहा। 1977 से 1991 के बीच सीपीआई(एम) ने लगातार कई चुनाव जीते और कुल मिलाकर इस सीट पर 9 बार जीत हासिल की। हालांकि, 2011 के बाद राजनीतिक तस्वीर बदल गई और तब से यहां तृणमूल कांग्रेस का दौर शुरू हुआ।
2011 में तृणमूल कांग्रेस के दीपक कुमार हलदर ने सीपीआई(एम) को हराकर सीट जीती। 2016 के चुनाव में उन्होंने एक बार फिर जीत दर्ज की। इसके बाद, 2021 के चुनाव से पहले दीपक हलदर भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में टीएमसी ने जीत हासिल की।
डायमंड हार्बर की राजनीति में अभिषेक बनर्जी का बड़ा प्रभाव माना जाता है। वे 2014 से इस क्षेत्र का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और लगातार तीन बार सांसद चुने जा चुके हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे होने के साथ-साथ पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख नेताओं में उनकी गिनती होती है। उनकी मौजूदगी ने इलाके में तृणमूल कांग्रेस के संगठन को और मजबूत किया है।
पिछले कुछ वर्षों में यहां के वोट शेयर में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भाजपा का वोट शेयर, जो पहले 7 प्रतिशत से भी कम रहता था, वह 2019 में 36.10 फीसदी और 2021 में 36.16 फीसदी तक पहुंच गया। हालांकि, 2024 में वोट प्रतिशत गिरकर 20.25 फीसदी रह गया। डायमंड हार्बर में वोटिंग प्रतिशत हमेशा ऊंचा रहता है। 2016 के विधानसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 88.89 फीसदी, 2019 के लोकसभा चुनाव में 85.37 फीसदी, 2021 के विधानसभा चुनाव में 88.40 फीसदी और 2024 के लोकसभा चुनाव में 80.42 फीसदी दर्ज किया गया।
पिछले एक दशक में हुए चुनाव के नतीजों पर अगर हम गौर करें तो तृणमूल कांग्रेस की स्थिति काफी बेहतर नजर आती है। हालांकि, भाजपा ने यहां अपनी मौजूदगी बढ़ाते हुए खुद को एक मुख्य विपक्ष के तौर पर स्थापित किया है।
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