पश्चिम बंगाल

ममता बनर्जी और CPI(M) के बीच बढ़ी बातचीत, चुनाव आयोग के खिलाफ साझा मोर्चे के संकेत

Kavita2
26 Sept 2026 12:17 PM IST
ममता बनर्जी और CPI(M) के बीच बढ़ी बातचीत, चुनाव आयोग के खिलाफ साझा मोर्चे के संकेत
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पश्चिम बंगाल : राजनीति में लंबे समय से एक-दूसरे के विरोधी रहे तृणमूल कांग्रेस (TMC) और वामपंथी दलों के बीच अब संवाद की नई शुरुआत होती दिखाई दे रही है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों के बीच बढ़ते विरोध के बीच TMC और CPI(M) के नेताओं के संपर्क में आने की खबर सामने आई है। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बंगाल में दोनों दल लंबे समय से एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने CPI(M) के महासचिव एमए बेबी से बातचीत की है। दोनों दलों के बीच संपर्क ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों की गतिविधियां तेज हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी ने विपक्षी INDIA गठबंधन की बैठक जल्द बुलाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी संपर्क किया है।

लंबे समय के राजनीतिक विरोध के बीच नई बातचीत

पश्चिम बंगाल में TMC और वाम दलों की राजनीति लंबे समय से एक-दूसरे के खिलाफ रही है। राज्य में वाम मोर्चे के लंबे शासन के बाद TMC ने सत्ता संभाली थी। इसके बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव लगातार देखने को मिलता रहा। ऐसे में दोनों के बीच बातचीत की खबर बंगाल की राजनीति में एक अलग घटनाक्रम के तौर पर सामने आई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, अभी इसे किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन के रूप में नहीं देखा जा रहा है। फिलहाल बातचीत का केंद्र चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दे बताए जा रहे हैं। दोनों पक्षों की ओर से चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी आपत्तियां पहले भी सार्वजनिक की जाती रही हैं।

चुनाव आयोग को लेकर विपक्षी दलों की सक्रियता

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर पिछले दिनों विपक्षी दलों का विरोध तेज हुआ है। यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद और बढ़ा, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। चुनाव आयोग ने हालांकि अपने कामकाज में अलग-अलग विचारों को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

इसी मुद्दे पर TMC ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ममता बनर्जी ने 23 सितंबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पश्चिम बंगाल में पुराने मतदाता सूची के आधार पर नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की थी। ये उनके राजनीतिक आरोप और मांगें हैं; चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया का बचाव किया है।

बंगाल की SIR प्रक्रिया पर भी विवाद

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के SIR को लेकर भी राजनीतिक विवाद रहा है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि SIR के दौरान हटाए गए 27.16 लाख मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपील की। आयोग के अनुसार कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुईं, जिनमें नाम जोड़ने और आगे नाम हटाने से जुड़ी अपीलें शामिल थीं। आयोग ने यह भी कहा कि हटाए गए नामों में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं के रिकॉर्ड शामिल थे।

TMC इस प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठाती रही है। पार्टी का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की समीक्षा निर्धारित प्रक्रिया और सत्यापन के आधार पर की गई है। ऐसे में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के दावों के बीच अंतर बना हुआ है।

CPI(M) भी उठा चुकी है सवाल

CPI(M) ने भी हाल के दिनों में SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के भीतर सामने आए कथित मतभेदों की जांच और CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ऐसे माहौल में TMC और CPI(M) के बीच बातचीत को फिलहाल एक मुद्दा-आधारित संपर्क के रूप में देखा जा रहा है। दोनों पार्टियां INDIA गठबंधन की संस्थापक सदस्य हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में उनके बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और मतभेद बने रहे हैं। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मौजूदा बातचीत आगे किसी साझा राजनीतिक पहल तक पहुंचती है या केवल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों तक सीमित रहती है।

INDIA गठबंधन की बैठक की भी तैयारी

ममता बनर्जी की ओर से INDIA गठबंधन की बैठक जल्द बुलाने की अपील भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने राहुल गांधी से विपक्षी दलों की बैठक बुलाने को कहा है। चुनाव आयोग और SIR को लेकर अलग-अलग विपक्षी दलों के बीच पहले से ही विरोध दर्ज कराया जा रहा है। ऐसे में TMC और CPI(M) के बीच संपर्क विपक्षी दलों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा भी हो सकता है।

हालांकि, फिलहाल TMC और CPI(M) के बीच किसी चुनावी गठबंधन या सीटों के तालमेल की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। दोनों दलों के बीच बातचीत की वर्तमान जानकारी मुख्य रूप से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और विपक्षी समन्वय से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है।

बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि जिन दलों के बीच वर्षों से सीधा राजनीतिक मुकाबला रहा है, वे अब एक साझा मुद्दे पर संवाद करते नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह संपर्क किस रूप में आगे बढ़ता है और क्या इसका असर विपक्षी दलों के व्यापक समन्वय पर पड़ता है, इस पर राजनीतिक घटनाक्रम नजर रखेगा।

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