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पश्चिम बंगाल
दारिविट हाईस्कूल प्रकरण में एनआईए जांच को बरकरार रखने का फैसला स्वागतयोग्य: अभाविप
SHIDDHANT
6 Jan 2026 7:55 PM IST

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Kolkata कोलकाता। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) 2018 के दारिविट हाईस्कूल प्रकरण में दो अभाविप कार्यकर्ताओं, राजेश सरकार और तापन बर्मन, की पुलिस फायरिंग में मृत्यु के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच को बरकरार रखने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले का दिल से स्वागत करती है। न्यायालय का यह निर्णय न्याय और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अभाविप ने शुरुआत से ही निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की निरंतर मांग की थी, क्योंकि भ्रष्ट पश्चिम बंगाल सरकार मशीनरी की विश्वसनीयता गंभीर रूप से संदिग्ध थी। 2023 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एनआईए को जांच सौंपी थी, लेकिन उस निर्देश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने खंड पीठ में अपील दायर की थी।
घटना के लगभग सात वर्ष बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने दारिविट मामले में एनआईए जांच को बरकरार रखने का फैसला लिया है, जो न्याय की दिशा में स्वागतयोग्य कदम है। यह फैसला पश्चिम बंगाल राज्य सरकार के लिए एक बड़ा झटका है, जिसने बार-बार जांच को प्रभावित करने और कमजोर करने का प्रयास किया था।
एनआईए जांच को बरकरार रखकर न्यायालय ने पुनः यह पुष्ट किया है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण न्याय में बाधा नहीं डाली जा सकती, विशेषकर ऐसे प्रकरण में जहां किसी की मृत्यु हुई हो। अभाविप राजेश सरकार और तापस बर्मन के परिजनों के साथ इस लड़ाई में साथ है और यह सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष जारी रखेगी कि दोषियों को उनके पद या राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना कानून के तहत कठोरतम दंड मिले।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, "उच्च न्यायालय का यह फैसला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इस मामले को जिस तरह से दबाने का प्रयास किया गया, उसे लेकर न्यायपालिका गंभीर है। यह निर्णय विद्यार्थी विरोधी ममता सरकार की विफलता को उजागर करता है, जो पीड़ित परिवारों को न्याय सुनिश्चित करने में असमर्थ रही। अभाविप की यह स्पष्ट मांग है कि राज्य सरकार जांच में पूर्ण सहयोग करे और अपराधियों को संरक्षण देने के बजाय कानून के शासन का सम्मान करे। केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच ही पुलिस फायरिंग के पीछे की सच्चाई उजागर कर सकती है, और एनआईए इसके लिए सबसे उपयुक्त प्राधिकरण है।"
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