पश्चिम बंगाल

तीन हफ्ते में बदला फैसला, चार जिलों में अक्षय पात्र को मिली मिड-डे मील की मंजूरी वापस

Kavita2
16 Sept 2026 10:01 AM IST
तीन हफ्ते में बदला फैसला, चार जिलों में अक्षय पात्र को मिली मिड-डे मील की मंजूरी वापस
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्कूलों में मिड-डे मील यानी पीएम-पोषण योजना के संचालन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला वापस ले लिया है। राज्य सरकार ने अक्षय पात्र फाउंडेशन को चार जिलों के चयनित क्षेत्रों में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराने के लिए दी गई मंजूरी करीब तीन सप्ताह बाद वापस ले ली। स्कूल शिक्षा विभाग ने 21 अगस्त को इसकी अनुमति दी थी, जबकि 11 सितंबर को नया आदेश जारी कर पूर्व मंजूरी वापस लेने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई।

सरकार के पहले आदेश के तहत हावड़ा, पुरुलिया, उत्तर 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर के चयनित क्षेत्रों में अक्षय पात्र फाउंडेशन को पीएम-पोषण योजना के तहत भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी जानी थी। इसके लिए संबंधित जिला प्रशासन और योजना से जुड़े अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि व्यवस्था पूरी तरह लागू होने से पहले ही सरकार ने अपने पुराने आदेश को वापस ले लिया।

स्कूल शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव पारोमिता रॉय की ओर से 11 सितंबर को जारी आदेश में कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार 21 अगस्त 2026 को अक्षय पात्र फाउंडेशन को दी गई मंजूरी वापस ली जा रही है। आदेश में मंजूरी वापस लेने के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है।

इन इलाकों में लागू होनी थी व्यवस्था

अक्षय पात्र फाउंडेशन को उत्तर 24 परगना के विधाननगर, दमदम और राजारहाट-न्यू टाउन के अलावा हावड़ा और पुरुलिया के चयनित स्कूलों में भोजन पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी। पूर्व मेदिनीपुर में नंदीग्राम-1 और नंदीग्राम-2 ब्लॉक के स्कूल भी प्रस्तावित व्यवस्था में शामिल थे।

रिपोर्टों के अनुसार अक्षय पात्र फाउंडेशन ने 11 जुलाई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के समक्ष स्कूलों में भोजन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था। प्रस्ताव पर विचार के बाद 21 अगस्त को स्कूल शिक्षा विभाग ने मंजूरी प्रदान की और संबंधित प्रशासन को आगे की प्रक्रिया पूरी करने को कहा।

लेकिन करीब तीन सप्ताह बाद ही इस योजना के विस्तार पर ब्रेक लग गया। 11 सितंबर को मंजूरी वापस लिए जाने के बाद फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में पहले से चली आ रही व्यवस्था के तहत ही मिड-डे मील जारी रखने की बात सामने आई है।

आदेश में नहीं बताया गया कारण

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य सरकार के आदेश में फैसला वापस लेने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों के हवाले से बुनियादी ढांचे और भोजन व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों का उल्लेख किया गया है। इसे सरकार का आधिकारिक कारण नहीं माना जा सकता।

कुछ स्कूल प्रमुखों ने भी व्यवस्था लागू करने की तैयारियों और बच्चों को अलग से उबले अंडे उपलब्ध कराने में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का जिक्र किया है। अक्षय पात्र के भोजन को लेकर शाकाहारी मेन्यू का मुद्दा भी चर्चा में रहा है।

अंडे को लेकर भी सामने आई थी चुनौती

कोलकाता में नई मिड-डे मील व्यवस्था शुरू होने के बाद शाकाहारी भोजन को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद बच्चों को अलग से अंडे उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। कुछ रिपोर्टों के अनुसार चार जिलों में योजना का विस्तार होने पर अलग से अंडे उपलब्ध कराने की व्यवस्था और उससे जुड़े खर्च को लेकर भी व्यावहारिक सवाल सामने आए।

हालांकि सरकार ने अपने 11 सितंबर के आदेश में यह नहीं कहा है कि मंजूरी इन्हीं कारणों से वापस ली गई है। ऐसे में इस फैसले के पीछे किसी एक वजह को निश्चित रूप से बताना उचित नहीं होगा।

कोलकाता में पहले से चल रही अलग व्यवस्था

कोलकाता के करीब 500 स्कूलों में अन्नामृत फाउंडेशन के माध्यम से पीएम-पोषण के तहत भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था अगस्त से चल रही है। अक्षय पात्र फाउंडेशन को दी गई अनुमति इस मॉडल को कोलकाता से बाहर दूसरे जिलों तक विस्तार देने की दिशा में कदम मानी जा रही थी।

चार जिलों में मंजूरी वापस होने के बाद अब इस विस्तार को लेकर स्थिति बदल गई है। फिलहाल पुराने मॉडल के अनुसार बच्चों तक मिड-डे मील पहुंचाने की व्यवस्था जारी रहने की बात सामने आई है।

अक्षय पात्र फाउंडेशन की मंजूरी वापस लेने का फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसे दिए जाने और वापस लेने के बीच महज करीब तीन सप्ताह का अंतर रहा। 21 अगस्त को सरकार ने संस्था को चार जिलों के चयनित क्षेत्रों में पीएम-पोषण के तहत भोजन उपलब्ध कराने की अनुमति दी थी और 11 सितंबर को वही अनुमति वापस ले ली गई।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सरकार भविष्य में इन जिलों के लिए मिड-डे मील व्यवस्था में कोई नया बदलाव करती है या पहले से मौजूद प्रणाली को ही जारी रखती है। फिलहाल आधिकारिक आदेश से इतना स्पष्ट है कि अक्षय पात्र फाउंडेशन को चार जिलों के लिए मिली मंजूरी वापस ले ली गई है और इसके पीछे विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

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