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पश्चिम बंगाल
सीपीएम नेता सलीम बोले – ईसीआई की वोटर लिस्ट त्रुटियों से भरी, आयोग ने मानी कमजोरी
SHIDDHANT
27 Oct 2025 9:29 PM IST

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Kolkata कोलकाता। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी के बीच चुनाव आयोग (ECI) द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए सीपीआई(एम) के पश्चिम बंगाल सचिव मोहम्मद सलीम ने आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आयोग ने खुद अपनी कमजोरी और लापरवाही स्वीकार कर ली है। मोहम्मद सलीम ने कोलकाता में पत्रकारों से कहा – “चुनाव आयोग ने यह स्वीकार किया है कि मतदाता सूची त्रुटियों से भरी हुई है। आखिर अब तक वे क्या कर रहे थे? क्या वे सभी सालों से सोए हुए थे?” उन्होंने कहा कि सीपीआई(एम) लंबे समय से इस मुद्दे को उठा रही थी कि राज्य की मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों के नाम, डुप्लिकेट प्रविष्टियाँ और गलत पहचान विवरण शामिल हैं।
सलीम ने आगे कहा कि आयोग द्वारा अब इस विशेष संशोधन की घोषणा, उनके वर्षों से जारी आरोपों की पुष्टि करती है। “हम बार-बार कहते रहे हैं कि मतदाता सूची की सफाई जरूरी है। जिन लोगों का देहांत हो चुका है, उनके नाम अभी भी सूची में मौजूद हैं। कई वास्तविक मतदाताओं के नाम बिना सूचना हटाए जा रहे हैं। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। सीपीआई(एम) नेता ने आरोप लगाया कि इस तरह की त्रुटियों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव होती है और अगर वही अपूर्ण या गलत है, तो चुनाव की निष्पक्षता पर संदेह होना स्वाभाविक है।
सलीम ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को अब केवल घोषणाओं से आगे बढ़कर पारदर्शी और स्वतंत्र सत्यापन प्रक्रिया अपनानी चाहिए। “सिर्फ ‘स्पेशल रिवीजन’ की घोषणा करने से कुछ नहीं होगा। इसके लिए हर बूथ स्तर पर सक्रिय जांच, स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी और स्वतंत्र पर्यवेक्षण आवश्यक है। उन्होंने राज्य सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मतदाता सूची की गड़बड़ियों से कई बार शासन पक्ष को अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है। “यह खेल वर्षों से चल रहा है। गरीब और मजदूर वर्ग के मतदाता जिनके पास पहचान अपडेट कराने के संसाधन नहीं हैं, उनके नाम गायब कर दिए जाते हैं, जबकि मृत व्यक्तियों के नाम बरकरार रहते हैं।”
सीपीआई(एम) नेता ने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वे सभी राजनीतिक दलों के साथ संयुक्त बैठक करें और पारदर्शिता सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने आयोग से मांग की कि मतदाता सूची को सार्वजनिक रूप से ऑनलाइन प्रदर्शित किया जाए ताकि हर नागरिक उसे सत्यापित कर सके। राज्य में आगामी चुनावी तैयारियों को देखते हुए यह बयान राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। चुनाव आयोग ने हाल ही में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2025 की घोषणा करते हुए कहा था कि 1 जनवरी 2026 की स्थिति को आधार मानकर नई मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इसके तहत 5 नवंबर 2025 से 20 दिसंबर 2025 तक नाम जुड़वाने, संशोधन कराने या आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चलेगी।
इस घोषणा के बाद सीपीआई(एम), कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आयोग की तैयारी और निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह विवाद आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की विश्वसनीयता को केंद्र में ला सकता है। सलीम ने अंत में कहा – “हम आयोग से उम्मीद करते हैं कि वह केवल बयानबाजी तक सीमित न रहे, बल्कि हर नागरिक के मताधिकार की रक्षा करे। यही लोकतंत्र की असली कसौटी है। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गर्माने लगा है और इस बीच सीपीआई(एम) की यह प्रतिक्रिया एक बार फिर राज्य में मतदाता सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस को जन्म देती दिख रही है।
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