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Bangal बंगाल: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक हुमायूँ कबीर के हालिया निलंबन पर विपक्षी नेता और CPI(M) सांसद बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि TMC में न तो कोई राजनीतिक अनुशासन है और न ही कोई स्थायी नीति, क्योंकि आज किसी को निलंबित किया जाता है, और कल ही उसे वापस पार्टी में स्वागत किया जाता है। भट्टाचार्य ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "मैं नहीं मानता कि TMC कोई राजनीतिक पार्टी है या उसमें कोई संगठित अनुशासन है। आज किसी को निलंबित किया जाता है और कल ही उसे पार्टी में वापस स्वीकार कर लिया जाता है। यह दिखाता है कि TMC में निर्णय लेने की कोई स्थिर प्रक्रिया नहीं है।"
CPI(M) सांसद ने आगे कहा कि ऐसे बदलावों से जनता के बीच भ्रम पैदा होता है और यह दिखाता है कि TMC में आंतरिक लोकतंत्र और नीति को लेकर गंभीरता नहीं है। उनका यह भी कहना था कि विपक्ष के लिए यह अवसर है कि वह लोगों को बताएं कि किस तरह पार्टी में अनुशासन और जवाबदेही की कमी है। हुमायूँ कबीर के निलंबन की घोषणा TMC के शीर्ष नेतृत्व ने पिछले सप्ताह की थी। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता और संगठनात्मक नियमों का उल्लंघन बताते हुए किया। हालांकि, कबीर के समर्थक और स्थानीय नेताओं ने निलंबन को अनुचित और राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।
भट्टाचार्य ने कहा कि राजनीतिक दलों का काम जनता और पार्टी के हित में सही और स्पष्ट निर्णय लेना होता है, लेकिन TMC में यह प्रक्रिया अस्पष्ट और असंगठित नजर आती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आंतरिक विवादों से पार्टी की छवि जनता के बीच कमजोर होती है और इससे राज्य की राजनीति में अस्थिरता आती है। राज्य की राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि TMC में ऐसे अनुशासनहीन फैसले नए विवादों और दलगत संघर्षों को जन्म देते हैं। वहीं, विपक्षी पार्टियों के लिए यह मौका है कि वे इसे राजनीतिक लाभ में बदलें और अपनी राजनीतिक मजबूती दिखाएं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेदों और निलंबन के फैसलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मामलों से पार्टी की इमेज जनता में कमजोर होती है और चुनावी माहौल पर असर पड़ता है। भट्टाचार्य ने अंत में कहा कि यह कोई नई बात नहीं है कि TMC नेताओं को अस्थिर नीतियों और अचानक बदलावों के कारण विवादों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से अनुरोध किया कि भविष्य में ऐसे फैसलों में स्पष्टता और स्थिरता लाने की जरूरत है, ताकि राजनीतिक प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे।
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