पश्चिम बंगाल

रवींद्रनाथ ठाकुर की किताबों को लेकर बंगाल में बढ़ा विवाद

Ratna Netam
27 Aug 2026 3:05 PM IST
रवींद्रनाथ ठाकुर की किताबों को लेकर बंगाल में बढ़ा विवाद
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पश्चिम बंगाल : राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के बीच नया विवाद सामने आया है। शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से एक किताब लौटाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह किताब लंबे समय से मुख्यमंत्री के पास है और अब इसे वापस किया जाना चाहिए। शुभेंदु ने इस मामले में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर किताब वापस नहीं की गई तो वह आगे की कार्रवाई करने पर विचार करेंगे।
जानकारी के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी जिस किताब को लेकर ममता बनर्जी से मांग कर रहे हैं, वह पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और वामपंथी नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य से जुड़ी बताई जा रही है। शुभेंदु का कहना है कि यह किताब सरकारी या सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा है और इसे अपने पास रखने का अधिकार किसी एक व्यक्ति को नहीं है।
शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय और सरकार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चीजों को लेकर पारदर्शिता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किताब को लेकर उन्होंने पहले भी सवाल उठाए थे, लेकिन अब तक इसे वापस नहीं किया गया। इसी कारण उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसकी मांग उठाई है।
बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जल्द ही किताब वापस नहीं करती हैं तो वह इस मुद्दे को उचित मंच पर उठाएंगे। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे मामले ने बंगाल की सियासत में नया राजनीतिक रंग ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर टकराव चलता रहता है। ऐसे में एक किताब को लेकर शुरू हुआ विवाद भी राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।
शुभेंदु अधिकारी लगातार ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। वह राज्य सरकार की नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर कई बार सवाल उठा चुके हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस भी बीजेपी पर राजनीतिक आरोप लगाने का मौका नहीं छोड़ती।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। ऐसे में छोटे-छोटे मुद्दे भी बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लेते हैं। किताब लौटाने को लेकर उठे सवाल को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है।
बीजेपी का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक किताब का नहीं बल्कि सरकारी संसाधनों और रिकॉर्ड के इस्तेमाल से जुड़ा सवाल है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सार्वजनिक महत्व की चीजों को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
वहीं तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस मामले में कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पार्टी नेताओं का रुख है कि बीजेपी हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश करती है।
अब देखना होगा कि ममता बनर्जी इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और क्या वह किताब वापस करती हैं या नहीं। अगर विवाद आगे बढ़ता है तो यह मामला बंगाल की राजनीति में एक और टकराव का कारण बन सकता है।
फिलहाल शुभेंदु अधिकारी के बयान के बाद यह मुद्दा चर्चा में है। बीजेपी इसे जवाबदेही का मामला बता रही है, जबकि राजनीतिक जानकार इसे राज्य की सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक खींचतान का एक नया अध्याय मान रहे हैं।
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