पश्चिम बंगाल

नंदीग्राम उपचुनाव में BJP उम्मीदवार के हलफनामे पर कांग्रेस की याचिका खारिज

Kavita2
29 Sept 2026 12:59 PM IST
नंदीग्राम उपचुनाव में BJP उम्मीदवार के हलफनामे पर कांग्रेस की याचिका खारिज
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कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे में कथित गड़बड़ी को लेकर पश्चिम बंगाल कांग्रेस की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी है। कांग्रेस ने रथ की उम्र और उनके 10वीं कक्षा पास करने के वर्ष के बीच कथित विरोधाभास को लेकर चुनाव आयोग से दस्तावेजों की दोबारा जांच कराने की मांग की थी।

जस्टिस कृष्णा राव की एकल पीठ ने मामले पर सुनवाई पूरी होने के बाद 25 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। बाद में अदालत ने कांग्रेस की याचिका खारिज करने का आदेश सुनाया। अदालत के विस्तृत फैसले में इसके कानूनी आधार और अन्य पहलुओं का विस्तार से उल्लेख किया जाना था।

पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपनी याचिका में दावा किया था कि हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे में उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक बताई गई है, जबकि उन्होंने माध्यमिक यानी 10वीं कक्षा पास करने का वर्ष 1965 दर्ज किया है। कांग्रेस ने इन दोनों जानकारियों को एक-दूसरे से मेल नहीं खाने वाला बताया था। एक अन्य कानूनी रिपोर्ट में हलफनामे में रथ की उम्र 61 वर्ष दर्ज होने की बात कही गई है।

कांग्रेस का तर्क था कि यदि हलफनामे में दी गई उम्र सही है तो 1965 में माध्यमिक परीक्षा पास करने की जानकारी की पुष्टि जरूरी है। वहीं यदि शिक्षा से जुड़ी जानकारी सही है तो उम्र से संबंधित विवरण की जांच की जानी चाहिए। पार्टी ने इसी आधार पर चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाया था।

कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रित्जु घोषाल ने अदालत में कहा था कि पार्टी की मांग रथ की उम्मीदवारी तत्काल रद्द करने की नहीं है। उनका कहना था कि चुनाव आयोग की वैधानिक जिम्मेदारी है कि उम्मीदवार द्वारा दाखिल किए गए दस्तावेजों की उचित जांच की जाए। उन्होंने कोर्ट से चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को दस्तावेजों की जांच के लिए निर्देश देने की मांग की थी।

दूसरी ओर चुनाव आयोग ने याचिका का विरोध किया। आयोग की ओर से अदालत में कहा गया कि पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने नामांकन पत्रों की निर्धारित जांच के दौरान कोई आपत्ति नहीं उठाई थी। नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच 17 सितंबर को हुई थी और आयोग का तर्क था कि उसके बाद इस तरह की आपत्ति उठाना निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

चुनाव आयोग के वकील जिष्णु चौधरी ने अदालत के सामने कहा था कि कथित रूप से गलत विवरण अपने आप में उम्मीदवार का नामांकन खारिज करने का आधार नहीं बनता। आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने भी कहा कि उम्र से जुड़ी कथित विसंगति को ऐसा महत्वपूर्ण दोष नहीं माना जा सकता, जिससे रथ की उम्मीदवारी समाप्त हो जाए।

आयोग ने यह तर्क भी दिया कि चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम उम्र की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। इसलिए उम्मीदवार की उम्र से जुड़ा यह विवाद उसकी मूल पात्रता को प्रभावित नहीं करता। आयोग ने कहा कि नामांकन की जांच पूरी होने के बाद चुनाव प्रक्रिया को बाद में उठाई गई आपत्ति के आधार पर बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने हालांकि कहा था कि मामला केवल उम्मीदवार की उम्र का नहीं, बल्कि चुनावी हलफनामे में दी गई जानकारी की सत्यता और चुनाव आयोग की जांच प्रक्रिया से जुड़ा है। पार्टी की मांग थी कि चुनाव आयोग संबंधित शैक्षणिक दस्तावेजों और उम्र के रिकॉर्ड की जांच करे ताकि कथित अंतर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

हसीरानी रथ भाजपा की ओर से नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव की उम्मीदवार हैं। उनके नामांकन के बाद ही हलफनामे में दर्ज उम्र और शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद सामने आया था। कांग्रेस ने पहले इस मुद्दे को चुनाव आयोग के सामने उठाया और बाद में हाई कोर्ट का रुख किया।

याचिका में यह भी सवाल उठाया गया था कि यदि उम्मीदवार की उम्र करीब 60 या 61 वर्ष है तो 1965 में माध्यमिक परीक्षा पास करने का दावा किस तरह संभव है। कांग्रेस ने इसे प्रथम दृष्टया जांच योग्य विषय बताया था। हालांकि ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए थे और अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने का अर्थ अपने आप में हलफनामे में दिए गए प्रत्येक तथ्य की स्वतंत्र पुष्टि या खंडन नहीं है।

नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है। इस मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा था कि अदालत में चल रही इस याचिका से चुनाव परिणाम प्रभावित नहीं होगा। अदालत ने भी चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने जैसा कोई आदेश नहीं दिया था।

नंदीग्राम का उपचुनाव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीट खाली होने के बाद यहां विभिन्न दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं और चुनाव प्रचार जारी है। कांग्रेस और भाजपा के बीच उम्मीदवारों तथा चुनावी प्रक्रिया को लेकर कानूनी विवाद भी सामने आए हैं।

इस मामले में हाई कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या नामांकन की निर्धारित जांच पूरी होने के बाद कथित हलफनामा विसंगति के आधार पर अदालत चुनाव आयोग को नई जांच का आदेश दे सकती है। चुनाव आयोग ने इसका विरोध करते हुए प्रक्रिया और समयसीमा का हवाला दिया, जबकि कांग्रेस ने चुनावी हलफनामों की सत्यता को मतदाताओं के लिए जरूरी जानकारी बताया।

फिलहाल जस्टिस कृष्णा राव की अदालत ने कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही हसीरानी रथ की उम्मीदवारी के खिलाफ इस विशेष याचिका के जरिए मांगी गई राहत नहीं मिली है। नंदीग्राम में मतदान 6 अक्टूबर को निर्धारित है और चुनावी मुकाबला अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगा।

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