पश्चिम बंगाल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नारायण गुरु पर किताब 'द सेज हू रीइमैजिन्ड हिंदुइज्म' लिखी

SHIDDHANT
11 Jan 2026 11:11 PM IST
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नारायण गुरु पर किताब द सेज हू रीइमैजिन्ड हिंदुइज्म लिखी
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Kolkata कोलकाता: कांग्रेस सांसद और लेखक शशि थरूर ने दार्शनिक और समाज सुधारक श्री नारायण गुरु के जीवन और कार्यों पर आधारित अपनी नई किताब 'द सेज हू रीइमैजिन्ड हिंदुइज्म' को पेश किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नारायण गुरु 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में ऐसे संत थे जिन्होंने केरल में हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण सुधार किए। थरूर ने बताया, "नारायण गुरु ने जातिवाद और धार्मिक भेदभाव को चुनौती दी और समाज में समानता, शिक्षा और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया। तिरुवनंतपुरम का लगभग हर कोना उनके लिए पवित्र माना जाता है। लेकिन दक्षिण भारत के बाहर, जैसे दिल्ली, कोलकाता या मुंबई में उनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मैं चाहता था कि उनके योगदान और जीवन की गहराई लोगों तक पहुंचे। यही मकसद इस किताब को लिखने का था।

उनका कहना है कि नारायण गुरु केवल धार्मिक नेता नहीं थे, बल्कि एक विचारक और समाज सुधारक थे जिन्होंने समाज में समरसता, शिक्षा और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया। थरूर ने बताया कि उनकी किताब में गुरु के दृष्टिकोण, उनके सुधार कार्यों और उनके दर्शन के महत्व को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में समझाने की कोशिश की गई है। कांग्रेस सांसद ने कहा, "नारायण गुरु ने न केवल मंदिरों में सुधार किए, बल्कि समाज में महिलाओं और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया। उनकी शिक्षाओं में समानता और नैतिक जीवन के महत्व को प्रमुखता दी गई है। थरूर ने यह भी बताया कि किताब के माध्यम से वे चाहते हैं कि युवा पीढ़ी और अन्य राज्य के लोग नारायण गुरु के योगदान को समझें और उनके आदर्शों को अपनाएं।

उन्होंने कहा, "यह किताब न केवल उनके जीवन पर प्रकाश डालती है बल्कि यह आधुनिक हिंदू समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। किताब में नारायण गुरु के सुधारों, उनके दार्शनिक विचारों, उनके सामाजिक आंदोलनों और उनके योगदान को विस्तार से समझाया गया है। थरूर का मानना है कि उनकी शिक्षाओं का अध्ययन आज भी समाज में समानता, न्याय और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है। इस अवसर पर शशि थरूर ने नारायण गुरु के प्रभाव और उनकी शिक्षाओं की सार्वभौमिकता पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें दक्षिण भारत के बाहर भी पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस किताब से लोगों को गुरु के जीवन और उनके योगदान की सही जानकारी मिलेगी और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिलेगी।
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