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चंद्र कुमार बोस ने TMC से दिया इस्तीफा, कहा- मुख्यधारा की राजनीति से हुआ मोहभंग

कोलकाता। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों से उनका मोहभंग हो चुका है और उन्हें मौजूदा राजनीति में वैचारिक अंतर कम दिखाई देता है। बोस ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC की राजनीति में उन्हें कोई बड़ा अंतर नजर नहीं आता।
चंद्र कुमार बोस का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले उन्होंने TMC का दामन थामा था। इससे पहले वह BJP में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। BJP छोड़ने के बाद उन्होंने अपने उस फैसले को गलती बताया था और कहा था कि उनकी राजनीतिक सोच किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों और सिद्धांतों पर आधारित है।
बोस ने अपने इस्तीफे के बाद कहा कि वह अब युवाओं के नेतृत्व वाले एक प्रस्तावित राजनीतिक संगठन का मार्गदर्शन करेंगे। उन्होंने बताया कि यह संगठन नेताजी के आदर्शों पर आधारित होगा और देश की राजनीति में ध्रुवीकरण और टकराव की बजाय सकारात्मक एवं समावेशी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा।
उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा राष्ट्रहित, एकता और सामाजिक समरसता पर आधारित थी। मौजूदा राजनीतिक माहौल में उन्हें लगता है कि इन मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक नए राजनीतिक मंच की आवश्यकता है, जो युवाओं को नेतृत्व का अवसर दे सके।
चंद्र कुमार बोस लंबे समय से नेताजी की विरासत और विचारधारा को लेकर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि उनकी राजनीति का आधार किसी पार्टी की विचारधारा नहीं, बल्कि नेताजी के सिद्धांत हैं। उनका मानना है कि राजनीति में राष्ट्रीय एकता, विकास और लोगों के बीच सहयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बोस ने वर्ष 2016 में BJP का दामन थामा था और पार्टी में उन्हें पश्चिम बंगाल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी मिली थीं। वह BJP के प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं। हालांकि, समय के साथ पार्टी की नीतियों और राजनीतिक दिशा को लेकर उनके मतभेद सामने आने लगे। बाद में उन्होंने BJP से दूरी बना ली।
BJP छोड़ने के बाद चंद्र कुमार बोस ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए विकल्प की तलाश की और विधानसभा चुनाव से पहले TMC में शामिल हुए। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने TMC से भी अलग होने का फैसला कर लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चंद्र कुमार बोस का राजनीतिक सफर लगातार बदलावों से भरा रहा है। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ काम किया, लेकिन हर बार उन्होंने अपनी पहचान को नेताजी की विचारधारा से जोड़कर रखा। उनका ताजा फैसला राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा को जन्म दे सकता है।
बोस ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं हैं, लेकिन वह ऐसी राजनीति चाहते हैं जो लोगों को जोड़ने का काम करे। उन्होंने युवाओं को राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत बताई और कहा कि नई पीढ़ी को देश के भविष्य के निर्माण में आगे आना चाहिए।
उनके प्रस्तावित संगठन को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, बोस ने संकेत दिया है कि यह मंच नेताजी के राष्ट्रवाद, सामाजिक समानता और मानवीय मूल्यों पर आधारित होगा। संगठन का उद्देश्य पारंपरिक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से अलग एक वैकल्पिक राजनीतिक दृष्टिकोण पेश करना होगा।
चंद्र कुमार बोस का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। राज्य में आगामी चुनावों को देखते हुए सभी प्रमुख दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में बोस का किसी दल से अलग होकर नया राजनीतिक मंच बनाने का निर्णय राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चंद्र कुमार बोस का नया संगठन किस रूप में सामने आता है और क्या वह राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बना पाता है। फिलहाल बोस ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य सत्ता की राजनीति से अधिक नेताजी के आदर्शों को आगे बढ़ाना और युवाओं को एक नया राजनीतिक विकल्प उपलब्ध कराना है।





