पश्चिम बंगाल

वरिष्ठ IPS अधिकारी को बंगाल के DGP पद पर स्थायी करने को केंद्र सरकार ने दी मंजूरी

Kunti
25 Dec 2021 1:42 PM GMT
वरिष्ठ IPS अधिकारी को बंगाल के DGP पद पर स्थायी करने को केंद्र सरकार ने दी मंजूरी
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केंद्र सरकार ने आखिरकार वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी मनोज मालवीय को बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद पर स्थायी करने को मंजूरी दे दी है।

कोलकाता, केंद्र सरकार ने आखिरकार वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी मनोज मालवीय को बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद पर स्थायी करने को मंजूरी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा गुरुवार को जारी इस आशय का पत्र राज्य के गृह विभाग के पास पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि पूर्व डीजीपी वीरेंद्र का कार्यकाल इसी साल 31 अगस्त को समाप्त होने के बाद बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने मनोज मालवीय को अंतरिम (कार्यवाहक) डीजीपी नियुक्त किया था। हालांकि केंद्र की ओर से मंजूरी नहीं मिलने के कारण उन्हें अब तक स्थायी डीजीपी नहीं किया गया था। वह अंतरिम डीजीपी के रूप में कार्यरत थे। इधर, केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद अब राज्य सरकार इसके लिए विज्ञप्ति जारी करेगी।

बताते चलें कि राज्य के तत्कालीन डीजीपी वीरेंद्र का कार्यकाल इसी साल 31 अगस्त को समाप्त हो गया था। हालांकि नए डीजीपी पद को लेकर कई अफसरों के नामों की अटकलें लगाई जा रही थी और इस रेस में थे लेकिन आखिरी समय तक केंद्र की ओर से कोई नाम नहीं भेजे जाने के बाद ममता सरकार ने मालवीय को अंतरिम डीजीपी नियुक्त कर दिया था। 1986 बैच के आइपीएस मालवीय इससे पहले राज्य पुलिस के महानिदेशक (संगठन) के पद पर कार्यरत थे और राज्य के पूरे आइपीएस कैडर में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। बताते चलें कि अब सुप्रीम कोर्ट के नए दिशा-निर्देश के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का पैनल ही किसी राज्य में डीजीपी की नियुक्ति करता है। नए डीजीपी के चयन को लेकर राज्य और यूपीएससी के बीच खींचतान भी चल रही थी।
डीजीपी की नियुक्ति के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट भी पहुंची थी ममता सरकार
इससे पहले डीजीपी की नियुक्ति के मुद्दे पर केंद्र के साथ टकराव के बीच ममता सरकार मालवीय को कार्यवाहक डीजीपी नामित करने के अगले ही दिन दो सितंबर को सुप्रीम कोर्ट भी पहुंची थी और बिना यूपीएससी के दखल के डीजीपी की नियुक्ति की अनुमति मांगी थी। राज्य ने कहा था कि यूपीएससी के पास न तो अधिकारी क्षेत्र है और न ही उसमें किसी राज्य के डीजीपी पर विचार करने और नियुक्त करने की विशेषज्ञता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अगले ही दिन तीन सितंबर को बंगाल सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें बिना यूपीएससी के दखल के डीजीपी की नियुक्ति की अनुमति मांगी थी। अदालत ने बार-बार एक ही तरह की याचिका दाखिल करने को लेकर ममता सरकार को फटकार भी लगाई थी।
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