पश्चिम बंगाल

टॉलीवुड में ‘डर-मुक्त माहौल’ और पारदर्शिता पर BJP नेताओं की बैठक, सुधारों पर जोर

Kavita2
14 May 2026 10:34 AM IST
टॉलीवुड में ‘डर-मुक्त माहौल’ और पारदर्शिता पर BJP नेताओं की बैठक, सुधारों पर जोर
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West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल में टॉलीवुड यानी बंगाली फिल्म इंडस्ट्री को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इसी क्रम में बुधवार को एक अहम बैठक हुई, जिसमें फिल्म जगत से जुड़े मुद्दों और सुधारों पर विस्तार से बात की गई। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह बैठक मुख्यमंत्री नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari की ओर से बुलाई गई थी।

बैठक में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े वे तीन विधायक भी शामिल हुए जो पहले फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री से जुड़े कलाकार रह चुके हैं। इनमें Rupa Ganguly, Rudranil Ghosh और Hiran Chatterjee शामिल थे। इन सभी को टॉलीगंज फिल्म इंडस्ट्री में सुधारों की निगरानी और सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है।

बैठक में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का माहौल पूरी तरह “डर-मुक्त” और पारदर्शी होना चाहिए। नेताओं ने आरोप लगाया कि लंबे समय से इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों में प्रभावशाली समूहों का दबदबा बना हुआ है, जिसके कारण कई कलाकारों और तकनीशियनों को काम के अवसरों में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कुछ लोगों पर इंडस्ट्री के भीतर एक तरह की मोनोपॉली बनाने और सामान्य कामकाज को प्रभावित करने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे मामलों में जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाने की बात भी कही गई। नेताओं ने कहा कि किसी भी तरह की दबाव की राजनीति या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि शिक्षा, संस्कृति और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख विभागों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बैठक में मौजूदा व्यवस्थाओं में कमियों की पहचान करने और सुधार के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने पर भी जोर दिया गया।

बताया गया कि बैठक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में पारदर्शिता बढ़े और लोगों को बिना किसी दबाव के काम करने का माहौल मिले। टॉलीवुड को लेकर विशेष रूप से यह संदेश दिया गया कि वहां किसी भी प्रकार का दबाव या असमान व्यवहार नहीं होना चाहिए।

इस बैठक को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य की सांस्कृतिक और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों पर नई बहस शुरू हो गई है। फिलहाल सभी पक्षों से मिले सुझावों और रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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