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पश्चिम बंगाल
बंगाल: पुलिस एस्कॉर्ट की कमी से बेलडांगा हिंसा मामले के आरोपियों की कोर्ट पेशी टली
SHIDDHANT
5 Feb 2026 10:37 PM IST

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Kolkata कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हुई हिंसा के मामले में आरोपियों को गुरुवार को कोलकाता की अदालत में पेश नहीं किया जा सका। इस मामले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने राज्य पुलिस पर सवाल उठाए हैं। एनआईए ने अदालत को बताया कि अब तक उसे इस मामले की केस डायरी नहीं मिली है। इस पर नाराजगी जताते हुए न्यायाधीश ने आदेश दिया कि आरोपियों को 12 फरवरी को हर हाल में अदालत में पेश किया जाए।
साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि उस दिन बेलडांगा मामले के राज्य पुलिस के जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर देरी के कारणों की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा, मुर्शिदाबाद जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को पूरे मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट अदालत में सौंपने का आदेश भी दिया गया है। गुरुवार को बेलडांगा हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों को पेश नहीं किया जा सका। सभी आरोपी फिलहाल मुर्शिदाबाद की न्यायिक हिरासत में हैं।
एनआईए की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जेल अधीक्षक ने बताया है कि पुलिस एस्कॉर्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण आरोपियों को कोलकाता नहीं लाया जा सका। एनआईए ने यह भी कहा कि उसने पहले ही जेल प्रशासन को आरोपियों को सुरक्षित तरीके से अदालत लाने के लिए सूचित कर दिया था। जेल प्रशासन ने इसके बाद राज्य पुलिस से एस्कॉर्ट की मांग की थी, लेकिन बाद में जेल अधीक्षक ने एजेंसी को जानकारी दी कि पुलिस अधीक्षक ने वाहन और एस्कॉर्ट की व्यवस्था करने में असमर्थता जताई है। इसी वजह से आरोपियों को अदालत में पेश नहीं किया जा सका।
एनआईए ने यह भी कहा कि केस डायरी के बिना जांच आगे बढ़ाना संभव नहीं है। इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए मुर्शिदाबाद के पुलिस अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी और जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। न्यायाधीश ने साफ कहा कि 12 फरवरी को आरोपियों की पेशी सुनिश्चित की जाए और उस दिन पुलिस एस्कॉर्ट उपलब्ध कराई जाए।
गौरतलब है कि पिछले महीने झारखंड में मुर्शिदाबाद के प्रवासी मजदूर अलाउद्दीन शेख की मौत की खबर सामने आने के बाद बेलडांगा में हालात बिगड़ गए थे। 16 जनवरी को जब अलाउद्दीन का शव उनके गांव पहुंचा, तो स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों की अन्य राज्यों में हो रही मौतों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए। गुस्साए लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम किया, टायर जलाए और जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान सियालदह-लालगोला रेल मार्ग पर ट्रेन सेवाएं भी बाधित रहीं।
उसी दिन बेलडांगा में एक महिला पत्रकार पर भी हमला हुआ था। हालांकि पुलिस ने पहले दिन प्रदर्शन को नियंत्रित कर लिया था, लेकिन अगले दिन से इलाके में फिर तनाव फैल गया। पुलिस ने बाद में अदालत में दावा किया कि पहले दिन का विरोध प्रदर्शन कुछ हद तक स्वतःस्फूर्त था, जबकि दूसरे दिन की हिंसा पूर्व नियोजित थी। इस मामले में एक एआईएमआईएम नेता समेत कुल 36 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इससे पहले हाईकोर्ट ने कहा था कि यदि केंद्र सरकार चाहे तो बेलडांगा हिंसा की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी से कराई जा सकती है। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर केंद्र से अतिरिक्त बल भी मांग सकती है।
इसके बाद गृह मंत्रालय ने इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी थी।
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